
मिडिल ईस्ट संकट में कूटनीतिक दांव,डोनाल्ड ट्रंप का 15 सूत्रीय ईरान प्लान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव में परमाणु हथियार रोकने और युद्धविराम की बात है जबकि क्षेत्र में सैन्य संघर्ष अभी भी जारी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान के सामने 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसकी शुरुआत इस शर्त से होती है कि “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।” The New York Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम उस समय उठाया गया है जब सैन्य कार्रवाई जारी है और इसके साथ ही कूटनीतिक प्रयासों को भी तेज किया जा रहा है।
यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से भेजा गया है, जिसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका इस संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है, जो अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और कई देशों को अपनी चपेट में ले चुका है। इज़राइल के चैनल 12 के अनुसार, ट्रंप एक महीने के युद्धविराम का प्रस्ताव दे रहे हैं, जिसके दौरान दोनों पक्ष एक ऐसी योजना पर चर्चा करेंगे जिसमें ईरान के संवर्धित यूरेनियम को सौंपना और आगे संवर्धन पर रोक शामिल हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में समुद्री सुरक्षा के मुद्दों को भी शामिल किया गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज के जरिए पश्चिमी जहाजों की आवाजाही को काफी हद तक सीमित कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इस प्रस्ताव के तहत ईरान से इस जलमार्ग में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की अपेक्षा की गई है।
इसके बदले में, यदि ईरान इस योजना का पालन करता है, तो उस पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं, जो वर्षों से विभिन्न रूपों में लागू हैं। साथ ही, ईरान को बुशेहर परमाणु संयंत्र में नागरिक परमाणु ऊर्जा के विकास के लिए सहायता भी दी जा सकती है, जो 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले का एक प्रमुख केंद्र है।हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के नेतृत्व में इस प्रस्ताव को कितना समर्थन मिला है या तेहरान इस पर बातचीत के लिए तैयार है या नहीं। यह भी साफ नहीं है कि इज़राइल इस पहल का समर्थन करता है या नहीं।
कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद, युद्ध की स्थिति में फिलहाल कोई कमी नहीं दिख रही है। इज़राइली अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सैन्य अभियान कई हफ्तों तक जारी रह सकता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि जहां एक ओर ट्रंप और उनकी टीम कूटनीतिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, वहीं “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जारी रहेगा।
इस बीच, पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख आसिम मुनीर खुद को मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। वे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ अपने संबंधों का उपयोग कर संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। मिस्र और तुर्की भी ईरान को सकारात्मक बातचीत के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आसिम मुनीर ने ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ से संपर्क किया है और पाकिस्तान में वार्ता आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का समर्थन करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उनका देश इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए चल रहे संवाद प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है और जरूरत पड़ने पर वार्ता की मेजबानी करने के लिए तैयार है।
हालांकि, ईरान की त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर सवाल बने हुए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को संचार समस्याओं और सुरक्षा चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है। संघर्ष की शुरुआत में इज़राइली हमलों में कई शीर्ष ईरानी नेता मारे गए थे, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे, जिससे तेहरान में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
जहां एक ओर अमेरिका और इज़राइल ईरान के मिसाइल और परमाणु ढांचे को निशाना बना रहे हैं, वहीं ईरान भी इज़राइल और पड़ोसी देशों पर हमले जारी रखे हुए है। माना जा रहा है कि उसके पास अब भी उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का बड़ा भंडार मौजूद है।

