भारत में पकड़ा गया जिहादी ड्रग, NCB ने जब्त की ₹182 करोड़ की खेप
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सूत्रों के अनुसार, कैप्टागन का पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में इसके उत्तेजक और अत्यधिक उत्साह (यूफोरिक) पैदा करने वाले प्रभावों के कारण व्यापक रूप से दुरुपयोग किया जाता है। (सांकेतिक तस्वीर: @UNODC)

भारत में पकड़ा गया 'जिहादी ड्रग', NCB ने जब्त की ₹182 करोड़ की खेप

मुंद्रा पोर्ट और दिल्ली से NCB ने जब्त की 182 करोड़ रुपये की सिंथेटिक ड्रग्स, जांचकर्ताओं ने अवैध व्यापार के तारों को पश्चिम एशिया के तस्करी नेटवर्क से जोड़ा।


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भारत की शीर्ष ड्रग्स विरोधी एजेंसी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने देश के इतिहास में पहली बार कैप्टागन (Captagon) ड्रग्स की एक बहुत बड़ी खेप को जब्त करने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस ड्रग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और सुरक्षा गलियारों में अक्सर "जिहादी ड्रग" (Jihadi Drug) के नाम से भी संबोधित किया जाता है। भारत में जब्त की गई इस पहली खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने इस बेहद खतरनाक ड्रग को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port) और देश की राजधानी दिल्ली के नेब सराय (Neb Sarai) इलाके से बरामद किया है। इस पूरे मामले की जांच से जुड़े लोगों और आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, एक सीरियाई नागरिक (Syrian National) ने कथित तौर पर इस प्रतिबंधित ड्रग को चाय की पत्ती के पैकेटों/डिब्बों (Tea leaves box) के भीतर बहुत ही शातिर तरीके से छिपाकर रखा था। वहीं दूसरी तरफ, मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई इस ड्रग्स की खेप को एक ऐसे कंटेनर के भीतर भारत लाया गया था, जिसे कागजातों में आधिकारिक तौर पर ऊन का शिपमेंट (Wool Shipment) घोषित किया गया था।

आखिर क्या है कैप्टागन ड्रग और मूल रूप से इसका क्या उपयोग होता है?

कैप्टागन (Captagon) वास्तव में एक बेहद सामान्य स्ट्रीट नाम (अवैध बाजारों में इस्तेमाल होने वाला नाम) है, जो ऐतिहासिक और वैज्ञानिक रूप से 'फेनेथिलाइन' (Fenethylline) नाम के एक केमिकल कंपोनेंट से जुड़ा हुआ है। यह एक प्रकार का सिंथेटिक स्टिमुलेंट (कृत्रिम उत्तेजक) है, जिसे मूल रूप से 1960 के दशक में चिकित्सा विज्ञान द्वारा विकसित किया गया था। शुरुआत में इसका निर्माण ध्यान से जुड़े विकारों (Attention-related disorders) जैसे कि एडीएचडी (ADHD - अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) और नार्कोलेप्सी (Narcolepsy - अचानक अत्यधिक नींद आने की बीमारी) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के इलाज के लिए एक वैध दवा के रूप में किया गया था।

हालांकि, समय के साथ इस दवा के गंभीर साइड इफेक्ट्स सामने आने लगे। इसके अत्यधिक आदी बनाने वाले लक्षणों (लत लगने की संभावना) और इसके बड़े पैमाने पर होने वाले दुरुपयोग व गलत इस्तेमाल को लेकर वैश्विक स्तर पर गहरी चिंताएं पैदा हो गईं। इन चिंताओं के मद्देनजर, 1980 के दशक में इस दवा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। बाद में, संयुक्त राष्ट्र (UN) के साइकोट्रोपिक पदार्थों के कन्वेंशन (UN Convention on Psychotropic Substances) के तहत इसे 'शेड्यूल II' (Schedule II) की श्रेणी में वर्गीकृत कर पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया।

सुरक्षा और चिकित्सा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान समय में अवैध नशीली दवाओं के बाजारों में जो कैप्टागन टैबलेट्स पाई जाती हैं, वे मूल फेनेथिलाइन नहीं होतीं। आधुनिक अवैध बाजार में मिलने वाली इन गोलियों में आमतौर पर एम्फेटामाइन (Amphetamine), कैफीन (Caffeine), मेथमफेटामाइन (Methamphetamine) और कई अन्य प्रकार के सिंथेटिक उत्तेजकों का एक घातक मिश्रण होता है। इस ड्रग का निर्माण पूरी तरह से अवैध और गुप्त रूप से संचालित होने वाली प्रयोगशालाओं (Clandestine Operations) में चोरी-छिपे किया जाता है।

पश्चिम एशिया में कैप्टागन ड्रग का इतना अधिक दुरुपयोग क्यों होता है?

आधिकारिक सूत्रों ने इस बात का खुलासा किया है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के कई हिस्सों में कैप्टागन ड्रग का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जाता है, जिसका मुख्य कारण इसके शरीर पर होने वाले बेहद तीव्र उत्तेजक (Stimulant) और यूफोरिक (अत्यधिक कृत्रिम आनंद या उत्साह पैदा करने वाले) प्रभाव हैं।

इस ड्रग का सेवन करने के बाद इंसान के भीतर निम्नलिखित शारीरिक और मानसिक लक्षण या प्रभाव देखे जाते हैं...

मानसिक सतर्कता (Alertness) और शारीरिक ऊर्जा में अत्यधिक वृद्धि हो जाना।

भूख का पूरी तरह से मर जाना और शारीरिक थकान का बिल्कुल भी अहसास न होना।

कुछ समय के लिए अत्यधिक मानसिक उत्साह या कृत्रिम आनंद (Temporary Euphoria) की स्थिति में पहुंच जाना।

लंबे समय तक बिना सोए लगातार जागे रहने की क्षमता (Prolonged Wakefulness) प्राप्त कर लेना।

आत्मविश्वास के स्तर में अत्यधिक वृद्धि हो जाना और व्यवहार में अत्यधिक आक्रामकता (Aggression) आ जाना।

इसके साथ ही, डॉक्टरों और विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस नशीली दवा के बार-बार या लगातार इस्तेमाल से इंसान की सही और गलत का फैसला करने की क्षमता (Impaired Judgement) पूरी तरह से नष्ट हो जाती है। व्यक्ति अत्यधिक आवेगी व्यवहार (Impulsive Behaviour) करने लगता है और बार-बार के सेवन के बाद वह पूरी तरह से इस पर मनोवैज्ञानिक रूप से निर्भर (Psychological Dependence) हो जाता है। पश्चिम एशिया के कुछ विशिष्ट और गरीब क्षेत्रों में इस अत्यधिक आक्रामकता पैदा करने वाली ड्रग को "गरीबों की कोकीन" (Poor Man’s Cocaine) के नाम से भी पुकारा जाता है।

कैप्टागन को "जिहादी ड्रग" (Jihadi Drug) के नाम से क्यों जाना जाता है?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक सुरक्षा चर्चाओं में कैप्टागन को अक्सर "जिहादी ड्रग" के रूप में परिभाषित और प्रचारित किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे मुख्य वजह पिछले कई वर्षों के दौरान अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों को मिले इनपुट्स और लगातार सामने आए वे आरोप हैं, जो इसके अवैध व्यापार और उपभोग के तारों को पश्चिम एशिया के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों (Conflict-Zones) में सक्रिय चरमपंथी और आतंकवादी नेटवर्कों से सीधे तौर पर जोड़ते हैं।

यह विशिष्ट शब्दावली (जिहादी ड्रग) मुख्य रूप से उन मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया जानकारियों के बाद दुनिया के सामने आई, जिनमें यह खुलासा हुआ था कि इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) जैसे कुख्यात आतंकवादी संगठनों द्वारा अपने लड़ाकों के बीच इस ड्रग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा था।

इस नशीली दवा के तीव्र उत्तेजक प्रभावों के कारण इसके सेवन करने वाले आतंकवादी और लड़ाके निम्नलिखित चीजें करने में सक्षम हो जाते थे:

वे बिना सोए और बिना थके बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी बहुत लंबे समय तक लगातार जागने में सक्षम हो जाते थे।

यह ड्रग उनके भीतर से मौत के डर, मानसिक थकावट और कमजोरी के अहसास को पूरी तरह से दबा देती थी।

इसके सेवन से लड़ाकों के भीतर अत्यधिक आक्रामकता और किसी भी हद तक जाकर जानलेवा जोखिम लेने का व्यवहार (Risk-Taking Behaviour) पैदा हो जाता था।

यह अत्यधिक तनावपूर्ण और युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों के बीच भी उन्हें लंबे समय तक कॉम्बैट (लड़ाई) जैसी गतिविधियों में बिना रुके टिके रहने की क्षमता प्रदान करती थी।

पिछले एक दशक के दौरान विभिन्न युद्धग्रस्त और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष वाले क्षेत्रों से की गई कई बड़ी जांचों और वहां से बरामद की गई नशीली दवाओं की खेपों से यह पूरी तरह स्पष्ट हुआ है कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय हथियारों से लैस विद्रोही समूहों, आतंकी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट्स के पास से भारी मात्रा में कैप्टागन की टैबलेट्स बरामद की गई हैं। इसके अलावा, आधिकारिक सूत्रों का यह भी कहना है कि कैप्टागन की अंतरराष्ट्रीय तस्करी और अवैध व्यापार के जरिए जो अरबों डॉलर का भारी-भरकम मुनाफा कमाया जाता है, वह ISIS जैसे खतरनाक चरमपंथी नेटवर्कों के लिए अवैध फंडिंग (Illicit Financing) और हथियार खरीदने का एक बहुत बड़ा और मुख्य जरिया बन चुका है।

आधुनिक कैप्टागन गोलियां मूल दवा से किस प्रकार अलग हैं?

आज के दौर में अवैध बाजारों में बिकने वाली आधुनिक कैप्टागन टैबलेट्स पूरी तरह से गैर-कानूनी फैक्ट्रियों और प्रयोगशालाओं में बनाई जा रही हैं, और इनमें मूल कैप्टागन दवा का फॉर्मूला यानी 'फेनेथिलाइन' कंपोजिशन बिल्कुल भी नहीं होता है। हाल के वर्षों में दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जब्त की गई लाखों गोलियों के रासायनिक परीक्षण में यह पाया गया है कि इन गोलियों में मुख्य रूप से एम्फेटामाइन, भारी मात्रा में कैफीन या अन्य प्रकार के मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले साइकोएक्टिव पदार्थ मिलाए जा रहे हैं। यहां तक कि कुछ रिपोर्टों में तो यह भी सामने आया है कि जब्त की गई कई गोलियों के भीतर किसी भी प्रकार का कोई वास्तविक उत्तेजक तत्व (Stimulant Ingredient) था ही नहीं, बल्कि वे केवल चाक या अन्य रसायनों का मिश्रण थीं।

(नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो - एनसीबी की रिपोर्ट और इनपुट्स पर आधारित)

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