
ईरान ने अमेरिका संग समझौते को बताया बड़ी जीत, कई रियायतों का दावा
ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते को बड़ी जीत बताया है। ईरानी मीडिया ने प्रतिबंधों में राहत, मुआवजे और युद्धविराम समेत कई दावे किए हैं।
ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए हुए समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत करार दिया है। समझौते की घोषणा के बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने बयान जारी कर कहा कि तेहरान ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपनी श्रेष्ठता साबित की है। परिषद के अनुसार, रविवार शाम को दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्ति से जुड़े मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया।
हालांकि, अभी तक न तो ईरान और न ही अमेरिका ने समझौते का आधिकारिक और अंतिम दस्तावेज सार्वजनिक किया है। ऐसे में समझौते से जुड़ी कई जानकारियां फिलहाल ईरानी मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
समझौते में ईरान को कई रियायतें मिलने का दावा
ईरानी मीडिया का दावा है कि प्रस्तावित समझौते में ईरान पर लगाए गए विभिन्न आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों को हटाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों का एक हिस्सा जारी किया जाएगा, जबकि आगे चलकर इस राशि को और बढ़ाया जा सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, समझौते में यह भी कहा गया है कि ईरान को उसके वित्तीय संसाधनों तक पूरी पहुंच बहाल की जाएगी। मसौदे में कथित तौर पर अगले 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान ईरान को 24 अरब डॉलर जारी करने का प्रावधान है, जिसमें से 12 अरब डॉलर अंतिम वार्ता शुरू होने से पहले ट्रांसफर किए जाने की बात कही गई है।
युद्धविराम और सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति
ईरानी मीडिया के अनुसार, समझौते में सभी मोर्चों पर पूर्ण और स्थायी युद्धविराम का प्रावधान शामिल है। इसमें लेबनान समेत विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की बात कही गई है। साथ ही दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी और ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह हटाने का भी उल्लेख किया गया है।
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिवालय ने कहा है कि समझौते के अनुसार सभी सैन्य गतिविधियां तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाएंगी, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को बढ़ावा मिलेगा।
परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी चर्चा
समझौते के मसौदे में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान का समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम और उसकी परमाणु सुविधाएं देश के भीतर ही बनी रहेंगी।इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के प्रबंधन की जिम्मेदारी ईरान को सौंपे जाने और भविष्य में वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की व्यवस्था का भी दावा किया गया है।
300 अरब डॉलर के मुआवजा फंड का दावा
ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया है कि युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का विशेष मुआवजा फंड बनाया जाएगा। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी आधिकारिक दस्तावेज या अमेरिकी प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना
ईरान ने इस समझौते को संभव बनाने में पाकिस्तान की भूमिका की भी सराहना की है। ईरानी अधिकारियों ने मध्यस्थता प्रयासों के लिए इस्लामाबाद का आभार जताया है। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार तड़के सबसे पहले अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने पर सहमति जताई है। शरीफ के मुताबिक, यह समझौता पूरे मध्य पूर्व में तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
आधिकारिक दस्तावेज का इंतजार
हालांकि, समझौते को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। ईरानी मीडिया के दावों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से अब तक दिए गए बयानों में कई महत्वपूर्ण अंतर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में समझौते का आधिकारिक और अंतिम मसौदा सार्वजनिक होने के बाद ही इसकी वास्तविक शर्तों और प्रभावों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

