अड़ गया ईरान, अमेरिका से बातचीत का चैप्टर हुआ क्लोज? पाकिस्तान की मेहनत पर फिरा पानी
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अड़ गया ईरान, अमेरिका से बातचीत का चैप्टर हुआ क्लोज? पाकिस्तान की मेहनत पर फिरा पानी

ईरान का मानना है कि अमेरिका न केवल सीजफायर का उल्लंघन हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की भी धज्जियां उड़ाई है। इसी लिए ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए अपने वार्ताकारों को इस्लामाबाद भेजने से इंकार किया है।


मध्य-पूर्व और खाड़ी देशों में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए अपने वार्ताकारों को इस्लामाबाद भेजने की कोई योजना नहीं बना रहा है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच हुआ बेहद नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) खत्म होने में 48 घंटे से भी कम का समय बचा है। यदि बुधवार तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो दुनिया एक बार फिर दो शक्तिशाली देशों के बीच भीषण युद्ध की गवाह बन सकती है।

ईरान की नाराजगी की वजह क्या है?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कड़े शब्दों में अमेरिका की आलोचना की। बघाई का कहना है कि वाशिंगटन ने युद्धविराम लागू होने के पहले दिन से ही इसका उल्लंघन किया है। उन्होंने 13 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी और हाल ही में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के एक कंटेनर जहाज को जब्त किए जाने का हवाला दिया।

ईरान का मानना है कि ये हरकतें न केवल सीजफायर का उल्लंघन हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की भी धज्जियां उड़ाना हैं। बघाई ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर अमेरिका और इजरायल ने फिर से आक्रामकता दिखाई, तो ईरानी सेना इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।" ईरान अब भी अपने उस 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर अड़ा है, जिसे उसने पहले दौर की बातचीत में पेश किया था।

डोनाल्ड ट्रंप का 'नो मोर मिस्टर नाइस गाई' अवतार

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी आक्रामक शैली में ईरान को ललकारा। ट्रंप ने घोषणा की कि उनके प्रतिनिधि दूसरे दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान रवाना हो रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को ऐसी धमकी भी दे डाली जिसने माहौल को और बिगाड़ दिया।

ट्रंप ने ईरान पर शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में फ्रांसीसी और ब्रिटिश जहाजों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया और इसे सीजफायर का पूर्ण उल्लंघन बताया। ट्रंप ने लिखा, "हम एक बहुत ही उचित और वाजिब डील (DEAL) की पेशकश कर रहे हैं। अगर वे इसे नहीं मानते हैं, तो संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के हर एक पावर प्लांट और हर एक पुल को उड़ा देगा। अब और शराफत नहीं (NO MORE MR. NICE GUY)!"

मध्यस्थ पाकिस्तान की मुश्किल बढ़ी

इस पूरे विवाद में पाकिस्तान एक मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद दूसरे दौर की बातचीत की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। पाकिस्तानी अधिकारियों का लक्ष्य इस बार केवल एक बैठक कराना नहीं, बल्कि दोनों देशों को कई दिनों तक मेज पर बिठाए रखना है।

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान चाहता है कि दोनों देश एक 'सहमति पत्र' (MoU) पर हस्ताक्षर करें, जिससे युद्धविराम की अवधि कम से कम 60 दिनों के लिए बढ़ जाए। इससे एक स्थायी शांति समझौते तक पहुंचने का लंबा रास्ता साफ हो सकता था। लेकिन पिछले 24 घंटों में जिस तरह से तनाव बढ़ा है, उसने पाकिस्तान की इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

इतिहास से सबक न लेने की भूल?

ईरानी प्रवक्ता बघाई ने सीधे तौर पर कहा कि "अमेरिका अपने पिछले अनुभवों से सबक नहीं ले रहा है और इस तरह के रवैये का परिणाम कभी अच्छा नहीं होगा।" ईरान का गुस्सा इस बात पर है कि एक तरफ अमेरिका बातचीत का नाटक कर रहा है और दूसरी तरफ उसके व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाकर आर्थिक घेराबंदी कर रहा है।

दुनिया की नजरें बुधवार की समयसीमा पर

फिलहाल स्थिति 'अंधेरे में तीर' चलाने जैसी है। यदि ईरान अपने रुख पर कायम रहता है और बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं पहुंचता, तो बुधवार को सीजफायर खत्म होते ही युद्ध की ज्वाला दोबारा भड़क सकती है। ट्रंप की 'पावर प्लांट तबाह करने' की धमकी ने आग में घी डालने का काम किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान का कूटनीतिक प्रयास ईरान को मनाने में सफल होता है, या फिर खाड़ी क्षेत्र एक बार फिर मिसाइलों और बमों की गूँज से दहल उठेगा।

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