ईरानी सरकार और सेना में मतभेद! होर्मुज में भारतीय जहाजों पर फायरिंग
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ईरानी सरकार और सेना में मतभेद! होर्मुज में भारतीय जहाजों पर फायरिंग

क्या ईरान की सरकार और IRGC के बीच संवादहीनता है? होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय टैंकरों पर हुई गोलीबारी ने तेहरान के भीतर मचे सत्ता संघर्ष की पोल खोल दी है।


Strait Of Hormuz : क्या ईरान की निर्वाचित सरकार और उसकी ताकतवर सेना यानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के बीच कोई बड़ी दरार पैदा हो गई है? या फिर तेहरान के सत्ता के गलियारों में संवादहीनता इस कदर बढ़ गई है कि विदेश मंत्री के आदेशों की सेना को परवाह नहीं? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में दो भारतीय जहाजों पर ईरानी सेना ने अचानक गोलीबारी कर दी। यह घटना सीधे तौर पर ईरान के आंतरिक विरोधाभासों को उजागर करती है।


सरकार ने कहा रास्ता खुला है, सेना ने चला दी गोलियां
इस पूरे विवाद की जड़ में एक बड़ा भ्रम है। शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दुनिया को भरोसा दिलाया था कि लेबनान में सीजफायर के बाद होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है। लेकिन शनिवार को जब भारतीय सुपरटैंकर वहां से गुजरे, तो उन्हें स्वागत के बजाय गोलियों की गड़गड़ाहट मिली। यह साफ दिखाता है कि विदेश मंत्रालय और ग्राउंड पर तैनात IRGC के बीच तालमेल का नामोनिशान नहीं है।

भारत का कड़ा रुख: ईरानी राजदूत तलब
भारतीय जहाजों पर हुई इस फायरिंग ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। भारत ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली को तलब किया। भारत ने दोटूक शब्दों में अपनी चिंता जताते हुए पूछा है कि जब मार्ग खोलने की आधिकारिक घोषणा हो चुकी थी, तो फिर भारतीय टैंकरों को निशाना क्यों बनाया गया? बता दें कि इनमें से एक जहाज 20 लाख बैरल तेल लेकर जा रहा था।


IRGC की जिद और अराघची की बेबसी
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में सत्ता के दो अलग-अलग केंद्र काम कर रहे हैं। किंग्स कॉलेज के प्रोफेसर एंड्रियास क्रीग का कहना है कि होर्मुज की कमान पूरी तरह IRGC के हाथों में है, जो अराघची के 'सॉफ्ट डिप्लोमेसी' वाले बयानों को तवज्जो नहीं दे रही। हद तो तब हो गई जब ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'तस्नीम' ने खुद अपने विदेश मंत्री के पोस्ट को भ्रामक बता दिया। यह दिखाता है कि सेना सरकार के फैसलों को पलटने की ताकत रखती है।


वैश्विक संकट और ट्रंप की धमकियों का साया
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते इस कन्फ्यूजन का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान के भीतर मचे इस घमासान ने जहाजों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। फिलहाल IRGC ने नई शर्तें थोप दी हैं, जिससे साफ है कि अराघची के 'खुले रास्ते' वाले वादे पर सेना ने अपनी 'नाकेबंदी' की मुहर लगा दी है। अब सवाल यह है कि क्या ईरान की सरकार अपनी ही सेना पर लगाम लगा पाएगी?


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