
Iran -US War: ईरान का बड़ा कदम, पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को भेजा शांति वार्ता का नया प्रस्ताव
ईरान और अमेरिका के बीच हफ्तों से जारी तनाव को कम करने के लिए ईरान ने पाकिस्तान के जरिए एक नया शांति प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है। हालांकि दोनों देशों के बीच फिलहाल युद्धविराम है, लेकिन औपचारिक बातचीत बंद थी।
पश्चिम एशिया में हफ्तों से जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। ईरान ने अमेरिका के साथ जमी हुई शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है। शुक्रवार (1 मई, 2026) को ईरानी सरकारी मीडिया ने जानकारी दी कि यह प्रस्ताव मध्यस्थ देश पाकिस्तान के जरिए वाशिंगटन तक पहुँचाया गया है।
ईरानी समाचार एजेंसी 'इर्ना' (IRNA) के अनुसार, इस शांति प्रस्ताव का मसौदा गुरुवार शाम (30 अप्रैल, 2026) को इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपा गया। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई हफ्तों से युद्धविराम (Ceasefire) लागू है, लेकिन दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत पूरी तरह ठप पड़ी थी। अब इस नए कदम को तनाव कम करने की एक गंभीर कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बाजार में अभी भी बेचैनी: तेल की कीमतें आसमान पर
भले ही सीमा पर गोलीबारी थमी हुई है, लेकिन वैश्विक बाजारों में अभी भी डर का माहौल बना हुआ है। सबसे बड़ा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर दिख रहा है। युद्ध शुरू होने से पहले तेल की जो कीमतें थीं, आज कीमतें उससे 50% से भी ज्यादा ऊपर बनी हुई हैं।
बाजार के जानकारों और व्यापारियों का मानना है कि केवल युद्धविराम काफी नहीं है। तेल की कीमतों में इस भारी उछाल की सबसे बड़ी वजह 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का लंबे समय से बंद होना है। हॉर्मुज दुनिया का वह समुद्री रास्ता है जहाँ से वैश्विक तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। व्यापारियों को डर है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँची, तो यह रास्ता लंबे समय तक बंद रह सकता है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट और गहरा जाएगा।
पाकिस्तान की भूमिका और शांति की उम्मीद
ईरान और अमेरिका के बीच सीधे राजनयिक संबंध न होने के कारण पाकिस्तान लंबे समय से एक सेतु का काम करता रहा है। इस बार भी ईरान ने पाकिस्तान पर भरोसा जताया है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब उसकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंधों और युद्ध के कारण भारी दबाव है। वहीं, अमेरिका में भी तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू राजनीति गरमाई हुई है।
इस प्रस्ताव में क्या शर्तें हैं, इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें सुरक्षा गारंटी और तेल व्यापार को फिर से शुरू करने जैसे बिंदु शामिल हो सकते हैं। अगर अमेरिका इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है, तो यह पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
ईरान की इस पहल ने एक उम्मीद तो जगाई है, लेकिन रास्ता अभी भी कांटों भरा है। जब तक हॉर्मुज का रास्ता सुरक्षित नहीं होता और दोनों देश एक मेज पर बैठकर समझौता नहीं करते, तब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ रहा महंगाई का बोझ कम होना मुश्किल है। दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

