ईरान की अमेरिका को धमकी, टैंकरों पर हमले का मिलेगा ‘दो टूक जवाब’
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ईरान के बंदर अब्बास के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में लंगर डाले एक मालवाहक जहाज का दृश्य, शनिवार, 2 मई 2026। फोटो: एपी/पीटीआई

ईरान की अमेरिका को धमकी, टैंकरों पर हमले का मिलेगा ‘दो टूक जवाब’

ईरानी सरकारी टीवी ने शनिवार को यह चेतावनी प्रसारित की। यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले अमेरिका ने ईरान के दो तेल टैंकरों पर हमला किया था।


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दुबई, 10 मई (एपी): ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी तेल टैंकरों या वाणिज्यिक जहाजों पर कोई हमला हुआ तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दुश्मन जहाजों पर “भीषण हमला” किया जाएगा।

ईरानी सरकारी टीवी ने शनिवार को यह चेतावनी प्रसारित की। यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले अमेरिका ने ईरान के दो तेल टैंकरों पर हमला किया था। हालांकि इसके बावजूद नाजुक संघर्ष विराम फिलहाल कायम दिखाई दे रहा है।

उधर बहरीन, जहां अमेरिकी नौसेना का क्षेत्रीय मुख्यालय स्थित है, ने दावा किया कि उसने दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके संबंध ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से बताए जा रहे हैं।

शुक्रवार को ईरानी जहाजों पर हुए हमलों ने करीब एक महीने पुराने संघर्ष विराम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि संघर्ष विराम अभी भी प्रभावी है।

वॉशिंगटन अब ईरान की उस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है, जिसका उद्देश्य युद्ध समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से जहाजरानी के लिए खोलना और तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है।

अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसकी सेना ने ईरान के दो तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया, जो ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। इससे कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने दावा किया था कि उसने नौसेना के तीन जहाजों पर होने वाले हमलों को विफल किया और जलडमरूमध्य में ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया।

बहरीन ने बताया कि गिरफ्तार किए गए 41 लोग एक ऐसे समूह का हिस्सा हैं, जिसका संबंध ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से है। बहरीन के गृह मंत्रालय ने कहा कि जांच में सामने आया कि ये लोग रिवोल्यूशनरी गार्ड के संपर्क में थे और “ईरान भेजने के लिए धन इकट्ठा कर रहे थे” ताकि उसकी “आतंकी गतिविधियों” को समर्थन दिया जा सके।

फारस की खाड़ी में स्थित छोटे द्वीपीय देश बहरीन में सुन्नी मुस्लिम राजशाही शासन है। लेकिन वहां शिया आबादी बहुसंख्यक है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि बहरीन सरकार ईरान-अमेरिका युद्ध का इस्तेमाल असहमति को दबाने के बहाने के रूप में कर रही है।

ईरान ने बहरीन को भी चेतावनी दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीजी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अमेरिका समर्थित प्रस्ताव का साथ देने के गंभीर परिणाम होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य एक जीवनरेखा है, इसे हमेशा के लिए खुद पर बंद होने का जोखिम मत उठाइए।”

अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को युद्ध शुरू किए जाने के बाद से ईरान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को काफी हद तक अवरुद्ध कर रखा है। इससे दुनियाभर में ईंधन की कीमतों में उछाल आया और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई।

अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की अपनी अलग नाकेबंदी लागू कर रखी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को कहा कि उसकी सेना ने 58 वाणिज्यिक जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया और 13 अप्रैल से शुरू हुई नाकेबंदी के बाद अब तक चार जहाजों को “निष्क्रिय” किया जा चुका है।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वह एक युद्धपोत मध्य पूर्व भेज रहा है, जो संघर्ष समाप्त होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के संभावित मिशन में शामिल होगा।

मंत्रालय ने बताया कि एचएमएस ड्रैगन क्षेत्र में पहले से तैनात रहेगा और ब्रिटेन-फ्रांस के संयुक्त सुरक्षा अभियान में शामिल होने के लिए तैयार रहेगा। फ्रांस ने भी इस सप्ताह घोषणा की थी कि वह अपने विमानवाहक पोत समूह को लाल सागर की ओर भेज रहा है।

ब्रिटेन और फ्रांस कई दर्जन देशों के साथ मिलकर ऐसे गठबंधन पर चर्चा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को फिर से सुरक्षित बनाना है। हालांकि दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान तभी शुरू होगा, जब स्थायी संघर्ष विराम लागू हो जाए और समुद्री उद्योग को यह भरोसा मिल जाए कि जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर चेतावनी दी है कि यदि ईरान जलडमरूमध्य खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने वाले समझौते को स्वीकार नहीं करता तो अमेरिका फिर से व्यापक बमबारी शुरू कर सकता है।

वहीं शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से कहा कि ईरान किसी भी “समय सीमा” पर ध्यान नहीं दे रहा है।

इस बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उनका देश संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने और शांति समझौते तक पहुंचने के लिए “दिन-रात” अमेरिका और ईरान के संपर्क में है।

रूस के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि रूस और सऊदी अरब दोनों युद्ध समाप्त करने के लिए “स्थायी और दीर्घकालिक समझौते” की दिशा में कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं।

मिस्र और कतर के शीर्ष राजनयिकों ने भी शनिवार को हुई फोन वार्ता में दोहराया कि इस संकट का समाधान केवल कूटनीति के जरिए ही संभव है।

शुक्रवार को ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई “पूर्ण रूप से स्वस्थ” हैं और जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आ सकते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं, जिससे उनकी स्थिति को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं।

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय से जुड़े मज़ाहेर होसेनी ने एक सरकारी समर्थक कार्यक्रम में कहा कि युद्ध के शुरुआती हमलों में मोजतबा खामेनेई के घुटने और पीठ में चोटें आई थीं। लेकिन अब वे काफी हद तक ठीक हो चुकी हैं।

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