
ट्रंप की ईरान डील पर इजरायल सख्त, पाकिस्तान की भूमिका भी की खारिज
अमेरिका-ईरान समझौते से तनाव कम होने की उम्मीद के बीच इजरायल ने साफ किया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और कार्रवाई जारी रखेगा।
जिनेवा में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले हैं, जिसका उद्देश्य पिछले कई महीनों से जारी तनाव को कम करना है। हालांकि, इस समझौते के बावजूद इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी सख्त नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि उनकी सरकार ने देश को संभावित विनाश से बचाया है, लेकिन संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो या न हो, इजरायल किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।
'हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई'
पत्रकारों से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा, "हमने इजरायल पर मंडरा रहे परमाणु खतरे को काफी हद तक समाप्त कर दिया है, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं। हमारी जंग अभी खत्म नहीं हुई है।"उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियानों ने ईरान से जुड़े परमाणु खतरे को काफी कमजोर किया है। हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इजरायल अपनी कार्रवाई जारी रखेगा।
ट्रंप से मतभेद स्वीकार, लेकिन साझेदारी बरकरार
नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी है, हालांकि हर मुद्दे पर दोनों नेताओं की राय एक जैसी नहीं होती। उन्होंने कहा, "ट्रंप और मैं साझेदार हैं। हम अक्सर एक-दूसरे से सहमत होते हैं और कभी-कभी असहमत भी होते हैं। लेकिन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जो भी आवश्यक होगा, हम वह करेंगे।"
लेबनान में बफर जोन से पीछे नहीं हटेगा इजरायल
लेबनान की स्थिति पर बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना ने उन रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है जिनका इस्तेमाल पहले हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल के खिलाफ किया जाता था। उन्होंने कहा, "जब तक आवश्यकता होगी, हम बफर जोन में बने रहेंगे। हम किसी भी हमले को रोकने के लिए कार्रवाई की स्वतंत्रता बनाए रखेंगे और किसी भी कीमत पर इन सुरक्षा क्षेत्रों को नहीं छोड़ेंगे।"
होर्मुज स्ट्रेट फिर खुलेगा, अमेरिकी नाकेबंदी हटेगी
अमेरिका-ईरान समझौते के तहत रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए फिर से खोला जाएगा। साथ ही, अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी भी हटाई जाएगी।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "ट्रुथ सोशल" पर इस समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने दावा किया कि पिछली अमेरिकी सरकारें ईरान के साथ ऐसा परिणाम हासिल करने में विफल रही थीं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की संभावना को इजरायल ने किया खारिज
इस बीच, भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने क्षेत्रीय शांति प्रयासों में पाकिस्तान की किसी भी संभावित भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया है।यह विवाद तब सामने आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि इजरायल और पाकिस्तान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं होने के बावजूद पाकिस्तान क्षेत्र में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अजार ने एएनआई से कहा, "हम पाकिस्तानियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं करते। इजरायल के प्रति उनका रवैया और उनके रक्षा मंत्री की यहूदी-विरोधी टिप्पणियां बेहद निंदनीय रही हैं।"
क्यों बिगड़े इजरायल-पाकिस्तान संबंध?
अप्रैल 2026 में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल को "कैंसर" और "मानवता के लिए अभिशाप" बताया था। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते से क्षेत्रीय तनाव में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन इजरायल की कड़ी सुरक्षा नीति और पाकिस्तान को लेकर उसकी आपत्तियों के कारण पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक चुनौतियां अभी समाप्त होती नहीं दिख रही हैं।

