
जापान की राजनीति में बदलाव, पहली महिला पीएम ताकाइची को भारी जनादेश
जापान के संसदीय चुनाव में पीएम साने ताकाइची की एलडीपी ने 316 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बहुमत हासिल किया, जिससे उनके दक्षिणपंथी एजेंडे को मजबूती मिली।
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की सत्तारूढ़ पार्टी ने 8 फरवरी को हुए अहम संसदीय चुनाव में दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल कर लिया। जापानी मीडिया के मुताबिक यह जीत भारी जनसमर्थन का नतीजा मानी जा रही है। चुनाव परिणामों के बाद सार्वजनिक प्रसारक NHK को दिए एक टेलीविज़न इंटरव्यू में ताकाइची ने कहा कि अब वह जापान को मजबूत और समृद्ध बनाने वाली नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
एलडीपी की ऐतिहासिक लैंडस्लाइड जीत
NHK ने वोटों की गिनती के नतीजों का हवाला देते हुए बताया कि ताकाichi की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने अकेले ही 316 सीटें जीत ली हैं। यह संख्या 465 सदस्यीय निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी 261 सीटों से कहीं ज्यादा है। यह सदन जापान की द्विसदनीय संसद का अधिक शक्तिशाली सदन है।
यह जीत 1955 में पार्टी की स्थापना के बाद से अब तक का रिकॉर्ड है और 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री यासुहिरो नाकासोने के नेतृत्व में जीती गई 300 सीटों के पुराने रिकॉर्ड को भी पार कर गई है।
एलडीपी मुख्यालय में जीत का जश्न मनाते हुए साने ताकाइची मुस्कुराते हुए विजयी उम्मीदवारों के नाम के आगे लाल रिबन लगाती नजर आईं, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता तालियां बजा रहे थे। ताकइची ने कहा कि वह विपक्ष का समर्थन हासिल करने की कोशिश करते हुए अपने नीतिगत एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ाएंगी। मैं लचीला रुख अपनाऊंगी।
दक्षिणपंथी एजेंडे को मिलेगी रफ्तार
हालांकि ऊपरी सदन में एलडीपी के पास बहुमत नहीं है, लेकिन निचले सदन में सीटों में हुई बड़ी बढ़ोतरी ताकाइची को अपने दक्षिणपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने का मौका देगी। इस एजेंडे का मकसद चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच जापान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना और अमेरिका के साथ संबंधों को और गहरा करना है।
ताकाichi बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन उनकी पार्टी एलडीपी, जो पिछले सात दशकों में अधिकांश समय सत्ता में रही है, हाल के वर्षों में फंडिंग और धार्मिक घोटालों से जूझती रही है। ताकाichi ने पद संभालने के सिर्फ तीन महीने बाद ही यह समयपूर्व चुनाव बुलाया था, ताकि अपनी लोकप्रियता के चरम पर रहते हुए पार्टी की स्थिति मजबूत की जा सके।
पहली महिला प्रधानमंत्री और नई राजनीतिक अपील
अति-रूढ़िवादी मानी जाने वाली साने ताकाichi ने अक्टूबर में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला था। उन्होंने “काम, काम और सिर्फ काम” करने का वादा किया है। उनका चुलबुला लेकिन सख्त अंदाज़ खासतौर पर युवाओं को आकर्षित कर रहा है, जिनमें से कई ने कहा कि वे पहले राजनीति में दिलचस्पी नहीं रखते थे।
विपक्ष, नई मध्यमार्गी गठबंधन और उभरते दक्षिणपंथी दलों के बावजूद, बिखरा हुआ नजर आया और ताकाइची को कोई मजबूत चुनौती नहीं दे सका। एलडीपी की पूर्व सहयोगी, बौद्ध समर्थित कोमेइतो पार्टी और उदारवादी झुकाव वाली कॉन्स्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान के नए गठबंधन को अपने चुनाव-पूर्व 167 सीटों के संयुक्त आंकड़े के आधे तक सिमटने का अनुमान है।
नीतियां और जनता की प्रतिक्रिया
ताकाichi इस चुनाव में इस भरोसे के साथ उतरी थीं कि उनकी एलडीपी पार्टी, नई सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी (JIP) के साथ मिलकर बहुमत हासिल कर लेगी। 53 वर्षीय ऑफिस कर्मचारी अकीहितो इवाताके ने एलडीपी की बड़ी जीत का स्वागत करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि पार्टी हाल के वर्षों में जरूरत से ज्यादा उदार हो गई थी। “ताकाichi के नेतृत्व में पार्टी का झुकाव फिर से रूढ़िवादी दिशा में हुआ, और यही इस सकारात्मक नतीजे की वजह बना।
प्रधानमंत्री जापान की सुरक्षा, आव्रजन और अन्य नीतियों में बड़े दक्षिणपंथी बदलाव लाना चाहती हैं। एलडीपी की दक्षिणपंथी सहयोगी JIP के नेता हिरोफुमी योशिमुरा ने कहा है कि उनकी पार्टी इस बदलाव को तेज़ करने का काम करेगी। हाल के वर्षों में जापान में दक्षिणपंथी लोकलुभावन ताकतों को भी बल मिला है, जिनमें वैश्वीकरण विरोधी और राष्ट्रवादी पार्टी सानसेइतो शामिल है। एग्ज़िट पोल्स में सानसेइतो को भी बड़ी बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है।
आगे की चुनौतियां
निचले सदन के मध्य फरवरी में दोबारा सत्र में लौटने पर ताकाichi की पहली बड़ी जिम्मेदारी बजट बिल पर काम करना होगा, जो चुनाव की वजह से टल गया था। इस बजट का मकसद बढ़ती महंगाई और ठहरी हुई मजदूरी से निपटने के लिए आर्थिक कदमों को फंड देना है।
ताकइची ने दिसंबर तक सुरक्षा और रक्षा नीतियों में संशोधन करने का वादा किया है, ताकि जापान की आक्रामक सैन्य क्षमताएं बढ़ाई जा सकें। इसमें हथियार निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनाए गए शांतिवादी सिद्धांतों से और दूरी बनाना शामिल है। वह विदेशियों, जासूसी-रोधी कानूनों और अन्य सख्त कदमों पर भी जोर दे रही हैं, जो दक्षिणपंथी मतदाताओं को आकर्षित करते हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नागरिक अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है।
प्रधानमंत्री रक्षा खर्च बढ़ाने की भी पक्षधर हैं, खासतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दबाव के बाद, जिसमें उन्होंने जापान से रक्षा बजट बढ़ाने की मांग की थी। अब 2028 तक कोई चुनाव नहीं होने के कारण ताकाइची के पास इन नीतियों पर काम करने के लिए पर्याप्त समय है।
विवादास्पद एजेंडा
हालांकि ताकाइची ने कहा है कि वह देश में विवादास्पद मानी जाने वाली नीतियों के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगी, लेकिन उन्होंने बढ़ते सैन्य खर्च के वित्तपोषण, चीन के साथ कूटनीतिक तनाव सुलझाने जैसे मुद्दों पर ज्यादा खुलकर बात नहीं की।
अपने चुनावी भाषणों में उन्होंने “संकट प्रबंधन निवेश और विकास” के लिए सक्रिय सरकारी खर्च की वकालत की, जिसमें आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और अन्य उद्योगों को मजबूत करने के उपाय शामिल हैं। वह आव्रजन पर भी सख्ती चाहती हैं—जैसे विदेशी संपत्ति मालिकों के लिए कड़े नियम और विदेशी निवासियों की संख्या पर सीमा तय करना।
रित्सुमेकान विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मसातो कामिकुबो के अनुसार, यह चुनाव जापानी राजनीति में एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहां नीतिगत नतीजों से ज्यादा राजनीतिक अस्तित्व को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा, “जब भी सरकार जरूरी लेकिन अलोकप्रिय सुधारों की कोशिश करती है, अगला चुनाव सामने आ जाता है।”
(एजेंसी इनपुट्स के साथ)

