भड़के कैंपबेल की ट्रंप को खरी-खरी गटर में पहुंचे भारत-अमेरिका संबंध!
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डोनाल्ड ट्रंप। कर्ट कैंपबेल। (फाइल फोटो/ विकिपिडिया)

भड़के कैंपबेल की ट्रंप को खरी-खरी 'गटर में पहुंचे भारत-अमेरिका संबंध!'

अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री ने भारत के साथ संबंधों में आई गिरावट के लिए डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को ठहराया जिम्मेदार बोले 'दिल्ली से दूर जा रहा वॉशिंगटन'


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पूर्व अमेरिकी उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने भारत और अमेरिका के बीच वर्तमान संबंधों को लेकर एक बड़ा और विवादित बयान दिया है। कैंपबेल ने भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों में आई गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज दोनों देशों के संबंध 'गटर' (रसातल) में पहुंच चुके हैं। एक पॉडकास्ट के दौरान बात करते हुए उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीतियों पर कड़ा प्रहार किया और आरोप लगाया कि मौजूदा प्रशासन उन कूटनीतिक रास्तों से भटक गया है, जिन्हें पिछले वर्षों में कड़ी मेहनत से तैयार किया गया था। कैंपबेल के अनुसार, भारत के साथ साझेदारी एक बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रही है।


बाइडन प्रशासन की रणनीति की सराहना

कर्ट कैंपबेल को बाइडन प्रशासन के दौरान भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूती देने वाला मुख्य सूत्रधार माना जाता है। उन्होंने अपनी बातचीत में बाइडन प्रशासन की 'इंडिया स्ट्रेटेजी' की जमकर तारीफ की और उसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता करार दिया। कैंपबेल ने कहा कि बाइडन के कार्यकाल में भारत के साथ जो रिश्ता बनाया गया था, वह भले ही चुनौतीपूर्ण था, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण था और उसके परिणाम भी काफी सकारात्मक रहे थे। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन उन असरदार रास्तों से दूर चला गया है, जिससे रिश्तों में भारी गिरावट आई है।

21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार

यह पहली बार नहीं है जब कर्ट कैंपबेल ने भारत के महत्व को रेखांकित किया है। इससे पहले भी वह कई मंचों पर भारत को अमेरिका का सबसे अनिवार्य सहयोगी बता चुके हैं। हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि 21वीं सदी में अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रिश्ता केवल भारत के साथ है। उनके अनुसार, वैश्विक स्थिरता और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी का कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

क्वाड (QUAD) की असली ताकत है भारत

कैंपबेल ने क्वाड समूह के गठन और उसकी सफलता में भारत की केंद्रीय भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने खुलासा किया कि क्वाड के पीछे की असली ताकत अमेरिका, जापान या ऑस्ट्रेलिया नहीं, बल्कि भारत है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार राष्ट्रपति बाइडन ने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री मोदी को क्वाड के शीर्ष स्तर पर शामिल होने के लिए राजी किया था। कैंपबेल के मुताबिक, भारत ने ही पर्दे के पीछे से इस चतुष्कोणीय गठबंधन को आकार देने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक शक्तिशाली समूह बनाता है।

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