
रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक विरोध की लहर, पाकिस्तान सरकार घिरी
रावलाकोट में फायरिंग के बाद पाक अधिकृत कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। JAAC पर प्रतिबंध के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में 7 जून की रात रावलाकोट में हुई गोलीबारी के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई फायरिंग में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जबकि मानवाधिकार संगठनों और भारतीय नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है।
सड़कों पर उतरे हजारों लोग
रावलाकोट समेत पीओके के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई को "दमनात्मक" करार दिया है।हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या 11 और घायलों की संख्या 70 से अधिक बताई गई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों और कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मरने वालों की संख्या 27 तक पहुंच सकती है, जबकि करीब 200 लोग घायल हुए हैं। इंटरनेट सेवाएं बंद होने के कारण इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
संकट के केंद्र में JAAC पर प्रतिबंध
मौजूदा विवाद की जड़ में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर लगाया गया प्रतिबंध है। यह एक नागरिक संगठन है, जो पिछले दो वर्षों से सस्ती बिजली, रियायती आटा, बेरोजगारी और बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर जन आंदोलन चला रहा था।5 जून को, जिस दिन पाकिस्तान ने 27 जुलाई को क्षेत्रीय चुनाव कराने की घोषणा की, उसी दिन प्रशासन ने पूरे पीओके में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं निलंबित कर दीं। साथ ही, आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया गया।इसके विरोध में JAAC ने 9 जून को पूरे क्षेत्र में बंद का आह्वान किया, जिसे व्यापक जनसमर्थन मिला।
बंद का व्यापक असर
बंद के दौरान बैंक, दुकानें और परिवहन सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं। प्रदर्शनकारियों ने भींबर से मुजफ्फराबाद तक प्रस्तावित 300 किलोमीटर लंबे मार्च का आयोजन किया, जिसे अर्धसैनिक बलों ने रोक दिया।रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान और चीन को जोड़ने वाले रणनीतिक काराकोरम हाईवे को भी कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया, जिससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गईं।
पाकिस्तान का पक्ष
पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को खारिज किया है।पीओके के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने पुष्टि की कि झड़पों के दौरान चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई और 20 से अधिक सुरक्षा अधिकारी घायल हुए।अधिकारियों का दावा है कि JAAC कार्यकर्ताओं ने आधुनिक हथियारों और पेट्रोल बमों का इस्तेमाल करते हुए गुरिल्ला शैली में हमला किया। हालांकि संगठन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
11 जून को रावलाकोट में एक बार फिर हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। JAAC नेताओं ने घटना की स्वतंत्र जांच कराने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की।
भारत की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर भारत में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।श्रीनगर में कश्मीर एसोसिएशन ऑफ टेरर विक्टिम्स के सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही की मांग की।संगठन की अध्यक्ष तस्लीमा अख्तर ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में निर्दोष नागरिकों पर लगातार गोलीबारी की जा रही है और पीड़ितों को न्याय मिलना चाहिए।
वहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष Farooq Abdullah ने भी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से हस्तक्षेप की अपील की।उन्होंने कहा कि वहां के हालात बेहद गंभीर हैं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को जाकर यह देखना चाहिए कि स्थानीय लोग किन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा
मानवाधिकार संगठन Amnesty International ने भी पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई की आलोचना की है।संगठन ने JAAC पर प्रतिबंध को गैरकानूनी और असंगत बताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन चुनावों से पहले असहमति की आवाजों को दबाने और अत्यधिक बल प्रयोग करने का प्रयास कर रहा है।
इसके अलावा, 50 से अधिक ब्रिटिश सांसदों ने भी इस मुद्दे पर ब्रिटेन सरकार को पत्र लिखा है। यह पहल उन ब्रिटिश कश्मीरी परिवारों की चिंताओं के बाद की गई, जो इंटरनेट बंदी के कारण अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
आगे क्या?
पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों के थमने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के कारण जमीनी हालात की स्वतंत्र जानकारी सीमित है।फिर भी इतना स्पष्ट है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लोग अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और राजनीतिक, आर्थिक तथा नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सुने जाने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

