
मिडिल ईस्ट में फिर भड़की आग, ईरान ने बंद किया 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज', दुनिया भर में तेल संकट का खतरा
इस हफ्ते की शुरुआत में जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हुआ था, तो वैश्विक बाजार ने राहत की सांस ली थी। जहाजों ने इस रास्ते से गुजरना शुरू कर दिया था।
मिडिल ईस्ट से एक बेहद डराने वाली खबर सामने आई है। ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने एलान किया है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को एक बार फिर से बंद कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब कुछ ही दिन पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था और इस रास्ते को जहाजों के लिए खोला गया था। ईरान ने सरकारी टेलीविजन पर बयान जारी कर इस कदम के लिए लेबनान पर इजराइल के लगातार हो रहे हमलों और अमेरिका की 'वादाखिलाफ़ी' को जिम्मेदार ठहराया है। इस फैसले के बाद पूरी दुनिया में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत होने का डर पैदा हो गया है।
ईरान ने क्यों लिया यह कड़ा फैसला?
ईरान के 'खातम-अल अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स' ने सरकारी टीवी पर कहा, "यह घोषणा की जाती है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह बंद किया जा रहा है। यह पहला कदम दुश्मन (अमेरिका और इजराइल) द्वारा वादा तोड़ने के जवाब में उठाया गया है। अगर उनका हमला जारी रहा, तो दुश्मन को उसकी प्रतिबद्धताओं को मानने पर मजबूर करने के लिए और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।"
दरअसल, इस हफ्ते की शुरुआत में जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हुआ था, तो वैश्विक बाजार ने राहत की सांस ली थी। जहाजों ने इस रास्ते से गुजरना शुरू कर दिया था और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी दोबारा बातचीत शुरू होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन ईरान का कहना है कि अमेरिका युद्ध को रुकवाने के अपने वादे को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहा है, इसलिए उसे यह रास्ता दोबारा बंद करना पड़ा।
सीजफायर की कोशिशों पर फिरा पानी
इस नए संकट की सबसे बड़ी वजह इजराइल और लेबनान के उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह के बीच जारी भीषण जंग है। शुक्रवार को दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई थी, जिसमें लेबनान के 47 लोग और इजराइल के 4 सैनिक मारे गए थे। इसके तुरंत बाद शनिवार को एक अंतरिम युद्धविराम (Ceasefire) की खबरें आईं, लेकिन चंद घंटों बाद ही इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह शहर और आसपास के गांवों पर भीषण हवाई हमले कर दिए।
इन ताजा हमलों में दो बच्चों समेत कम से कम 16 बेकसूर लोगों की मौत हो गई। मलबे के नीचे अभी भी कई लोग दबे हुए हैं। इजराइली सेना का दावा है कि हिजबुल्लाह ने रात भर में उनके सैनिकों पर 50 से ज्यादा रॉकेट दागे थे, जिसके जवाब में उन्होंने हिजबुल्लाह के ठिकानों और रॉकेट लॉन्चिंग पैड्स को निशाना बनाया। हालांकि वाशिंगटन में इजराइली राजदूत ने कहा था कि अगर हिजबुल्लाह हमला रोकेगा तो इजराइल युद्धविराम के लिए तैयार है, लेकिन हिजबुल्लाह ने इजराइल पर ही शुक्रवार रात कई बार सीजफायर तोड़ने का आरोप मढ़ दिया है।
खतरे में अमेरिका-ईरान की बड़ी 'डील'
यह पूरी जंग तब शुरू हुई थी जब इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर रॉकेट और ड्रोन दागने शुरू कर दिए और इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया।
इस संकट को सुलझाने के लिए इसी हफ्ते अमेरिका और ईरान ने एक समझौते पर दस्तखत किए थे। इस डील के तहत ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोल दिया था ताकि दुनिया भर में तेल-गैस की सप्लाई न रुके। लेकिन चूंकि इजराइल और हिजबुल्लाह इस समझौते में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं, इसलिए जमीनी स्तर पर जंग रुक नहीं पाई। नतीजा यह हुआ कि स्विट्जरलैंड में शुक्रवार से शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान की उच्च स्तरीय बैठक टल गई है और अब इसकी कोई नई तारीख तय नहीं है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कसम खा चुके हैं कि जब तक खतरा खत्म नहीं होता, उनके सैनिक लेबनान में रहेंगे। वहीं हिजबुल्लाह का कहना है कि जब तक इजराइल पीछे नहीं हटता, वे हमले नहीं रोकेंगे।
बचाव के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज
भले ही हालात बेहद गंभीर हैं, लेकिन इस शांति समझौते को बचाने के लिए पर्दे के पीछे कूटनीतिक कोशिशें भी तेज हो गई हैं। पाकिस्तान और कतर जैसे देश स्विट्जरलैंड, ईरान और मिस्र के बीच लगातार बातचीत कर रहे हैं ताकि रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू किया जा सके।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान (ईरान) ने संकेत दिया है कि वह वाशिंगटन के साथ आगे बढ़ने को तैयार है, बशर्ते अमेरिका गारंटी दे कि इजराइल युद्धविराम की शर्तों का पालन करेगा। ईरान की एक बातचीत करने वाली टीम स्विट्जरलैंड के लिए रवाना भी हो रही है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस (JD Vance) ने भी फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा है कि वे अगले कुछ दिनों में ईरानी अधिकारियों से बात करने के लिए स्विट्जरलैंड जा सकते हैं। वांस ने कहा, "यह एक बहुत ही नाजुक कूटनीतिक रास्ता है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि मैं अगले दो-तीन दिनों में रवाना हो जाऊंगा।" अब देखना यह होगा कि कूटनीति इस महासंकट को टाल पाती है या दुनिया एक नए आर्थिक और सैन्य युद्ध में फंसने वाली है।

