लिपुलेख विवाद पर नरम पड़ा नेपाल, भारत संग रिश्तों को दी नई दिशा
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लिपुलेख विवाद पर नरम पड़ा नेपाल, भारत संग रिश्तों को दी नई दिशा

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत को बड़ी आर्थिक और तकनीकी शक्ति बताते हुए कहा कि सीमा विवाद का समाधान केवल द्विपक्षीय बातचीत से ही संभव है।


भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को लेकर हाल के दिनों में तनावपूर्ण बयानबाजी देखने को मिली थी। हालांकि अब नेपाल की ओर से रिश्तों को लेकर नरम रुख सामने आया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत की आर्थिक और तकनीकी ताकत की सराहना करते हुए कहा है कि नेपाल सीमा संबंधी सभी मुद्दों का समाधान सौहार्दपूर्ण और द्विपक्षीय बातचीत के जरिए करना चाहता है।

भारत की ताकत को माना

भारत दौरे पर आए शिशिर खनाल ने कहा कि भारत आज एक बड़ी आर्थिक और तकनीकी शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।खनाल ने स्पष्ट किया कि नेपाल की नई सरकार भारत को किसी भी रूप में विरोधी देश नहीं मानती और दोनों देशों के बीच सहयोग तथा विश्वास को और मजबूत करना चाहती है।

भारत के साथ बेहतर रिश्तों पर जोर

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अतीत के विवादों में उलझने के बजाय भारत के साथ परस्पर लाभकारी संबंध विकसित करना चाहती है।उन्होंने कहा, "हम भारत के साथ सीमा विवाद को खुले मन से और द्विपक्षीय ढांचे के तहत सुलझाना चाहते हैं। 21वीं सदी की भू-राजनीति को लेकर हमारे दृष्टिकोण में कोई पूर्वाग्रह नहीं है।" खनाल ने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर बातचीत होगी तो किसी भी जटिल मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है।

एस. जयशंकर से हुई मुलाकात

तीन दिवसीय भारत दौरे पर आए शिशिर खनाल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों, सीमा मुद्दों और आपसी सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।बैठक के दौरान खनाल ने कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार नई दिल्ली के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, "भारत और नेपाल के बीच विशेष संबंध हैं, जो साझा सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ खुली सीमा पर आधारित हैं।"

लिपुलेख विवाद बना हुआ है प्रमुख मुद्दा

नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद का प्रमुख केंद्र लिपुलेख क्षेत्र है। नेपाल इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है और इसे अपने आधिकारिक मानचित्र में भी शामिल कर चुका है।वहीं भारत का कहना है कि ऐतिहासिक समझौतों और प्रशासनिक नियंत्रण के आधार पर यह क्षेत्र भारत का हिस्सा है। लिपुलेख सामरिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्रमुख मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।

तीसरे पक्ष की भूमिका पर भारत का रुख

हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने संकेत दिए थे कि सीमा विवाद के समाधान के लिए नेपाल चीन और ब्रिटेन सहित अन्य देशों से भी संपर्क में है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच चर्चा तेज हो गई थी।हालांकि भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सीमा विवाद के समाधान में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं होगी। भारत का मानना है कि दोनों देशों के बीच सीमा संबंधी सभी मुद्दों के समाधान के लिए पहले से स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है और इन्हीं माध्यमों से बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी।

बातचीत से समाधान की उम्मीद

नेपाल के विदेश मंत्री के ताजा बयान को दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब सीमा विवाद को लेकर बयानबाजी तेज थी, नेपाल का संवाद और सहयोग पर जोर देना द्विपक्षीय रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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