राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है, जिसे एक रणनीतिक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है. इस बैठक में मुख्य रूप से कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स, रक्षा संबंध, सीमा प्रबंधन (बॉर्डर मैनेजमेंट) और आर्थिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और दोनों पक्षों ने म्यांमार को भारत की विदेश नीति संरचना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बताया.
एक रणनीतिक निर्णायक मोड़: 'पड़ोसी पहले' और 'एक्ट ईस्ट' का केंद्र बना म्यांमार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार को भारत के तीन सबसे प्रमुख विदेश नीति सिद्धांतों के केंद्र में स्पष्ट रूप से स्थापित किया है. ये तीन सिद्धांत हैं— 'पड़ोसी पहले' (Neighbourhood First), 'एक्ट ईस्ट' (Act East) और हाल ही में घोषित 'महासागर' (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र विकास) ढांचा. पीएम मोदी ने साफ किया कि भारत के क्षेत्रीय लक्ष्यों और उत्तर-पूर्वी राज्यों की स्थिरता के लिए म्यांमार के साथ एक मजबूत और स्थिर संबंध बेहद जरूरी है.
इस यात्रा की संवेदनशीलता और महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने भी म्यांमार के राष्ट्रपति से अलग-अलग मुलाकात की. यह राजनयिक कदम साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में म्यांमार के साथ अपने संबंधों को कितनी उच्च प्राथमिकता दे रहा है.
सुरक्षा का बड़ा आश्वासन: भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा म्यांमार की धरती का इस्तेमाल संयुक्त बयान के सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित हिस्सों में से एक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन से जुड़ा रहा. राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने भारत को यह कड़ा और स्पष्ट आश्वासन दोहराया कि म्यांमार के संप्रभु क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ काम करने वाले तत्वों द्वारा नहीं किया जाएगा.
जवाब में, पीएम मोदी ने भी म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत की पूर्ण प्रतिबद्धता की पुष्टि की. रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का यह समर्थन बेहद सावधानीपूर्वक चुना गया है, क्योंकि म्यांमार की सैन्य सरकार को इस समय अपने देश के एक बड़े हिस्से में (जिसमें भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों से सटे सीमावर्ती इलाके भी शामिल हैं) स्थानीय सशस्त्र विद्रोही समूहों से कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है. दोनों देशों ने अपनी खुली सीमा पर सक्रिय विद्रोही समूहों की गतिविधियों और संप्रभु क्षेत्र के दुरुपयोग को रोकने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया.
कनेक्टिविटी और ट्रेड: रुपया-क्यात मैकेनिज्म को बढ़ावा और अटके प्रोजेक्ट्स में आएगी तेजी
आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर, दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने दो लंबे समय से अटकी पड़ी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जल्द पूरा करने पर सहमति जताई है:
कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना: फंडिंग और सुरक्षा कारणों से लंबित इस प्रोजेक्ट पर दोबारा तेजी से काम करने की बात कही गई.
भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग: प्रशासनिक और प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर इस गलियारे को क्षेत्रीय समृद्धि के लिए आवश्यक बताया गया.
रुपया-क्यात सेटलमेंट मैकेनिज्म: व्यापार को और सुगम बनाने के लिए दोनों सरकारों ने 'रुपया-क्यात द्विपक्षीय सेटलमेंट मैकेनिज्म' के प्रति अपना मजबूत समर्थन व्यक्त किया. मई 2024 में चालू किए गए इस मैकेनिज्म के बाद से दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में लेनदेन की मात्रा में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है. इसके साथ ही निवेश के लिए कृषि-प्रसंस्करण (Agri-processing), पेट्रोलियम, ऊर्जा और खनन को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चुना गया है.
जनसंपर्क और सभ्यतागत संबंध: स्कॉलरशिप में तीन गुना बढ़ोतरी
सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों को बढ़ावा देते हुए पीएम मोदी ने म्यांमार के छात्रों के लिए 'मेकांग गंगा ICCR छात्रवृत्ति' में एक बड़े विस्तार की घोषणा की. इसके तहत वर्ष 2026 से वार्षिक स्कॉलरशिप के आवंटन को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 36 से सीधे 100 कर दिया गया है.
बोधगया से शुरुआत: म्यांमार के राष्ट्रपति की इस यात्रा का आधिकारिक शुभारंभ बौद्ध आस्था के केंद्र बोधगया से हुआ था, जहां उन्होंने महाबोधि मंदिर, महाबोधि ध्यान केंद्र और सुजाता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की. इस कदम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सदियों पुराने गहरे बौद्ध और सभ्यतागत बंधनों की पुष्टि करना था, जो द्विपक्षीय संबंधों की ऐतिहासिक नींव हैं.