नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी, सेमीकंडक्टर सेक्टर में नई रणनीति तैयार
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नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी, सेमीकंडक्टर सेक्टर में नई रणनीति तैयार

प्रधानमंत्री मोदी की नीदरलैंड यात्रा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए अहम मानी जा रही है, जहां ASML के साथ तकनीकी सहयोग पर जोर रहेगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (15 मई) को अपने पांच देशों के दौरे के दूसरे चरण में नीदरलैंड पहुंचे। इस यात्रा को भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि यह दौरा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए अहम दौरा

हाल के वर्षों में भारत और नीदरलैंड के संबंध पारंपरिक क्षेत्रों जैसे व्यापार, निवेश, जल प्रबंधन, कृषि और स्वास्थ्य से आगे बढ़कर रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच गए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, दोनों देशों के बीच तकनीक, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और समुद्री सहयोग में तेजी से साझेदारी मजबूत हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित वेल्डहोवन शहर का दौरा करेंगे। यह दौरा इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यहां स्थित एक कंपनी भारत के सेमीकंडक्टर सपने की सबसे अहम कड़ी मानी जाती है।

ASML कंपनी क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

वेल्डहोवन में मुख्यालय वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी ASML दुनिया की सबसे बड़ी चिप-मेकिंग मशीन बनाने वाली कंपनियों में शामिल है। यह कंपनी लिथोग्राफी मशीनें बनाती है, जो सेमीकंडक्टर चिप निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक मानी जाती हैं।

लिथोग्राफी सिस्टम रोशनी की मदद से सिलिकॉन वेफर पर बेहद सूक्ष्म डिजाइन तैयार करते हैं। ASML के पास Extreme Ultraviolet (EUV) Lithography तकनीक का लगभग 100 प्रतिशत वैश्विक नियंत्रण माना जाता है। इसी तकनीक की मदद से 7-नैनोमीटर और उससे छोटे आकार की अत्याधुनिक चिप्स बनाई जाती हैं।

दुनिया में बनने वाली लगभग हर आधुनिक चिप किसी न किसी रूप में ASML की तकनीक पर निर्भर करती है। ऐसे में भारत का वैश्विक चिप निर्माण केंद्र बनने का सपना काफी हद तक इस डच कंपनी और उसकी सप्लाई चेन के साथ मजबूत रिश्तों पर टिका हुआ माना जा रहा है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ASML के शीर्ष अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।

भारत में बढ़ती संभावनाएं

पिछले साल ASML ने पहली बार SEMICON India 2025 में हिस्सा लिया था। कंपनी ने भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर उद्योग में साझेदार बनने की इच्छा जताई थी।कंपनी ने अपने आधुनिक लिथोग्राफी सिस्टम, कंप्यूटेशनल सॉफ्टवेयर, मेट्रोलॉजी और इंस्पेक्शन सॉल्यूशंस को प्रदर्शित किया था। ASML का कहना है कि भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2026 तक 55 अरब डॉलर और 2030 तक 100 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।

स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, 5G और IoT सेक्टर में बढ़ती मांग और सरकार की मजबूत नीतियां इस विकास को गति दे रही हैं। कंपनी का मानना है कि उसकी उन्नत तकनीक भारतीय चिप निर्माताओं को छोटे, तेज और ज्यादा शक्तिशाली चिप बनाने में मदद करेगी।

ASML ने भारत को लेकर क्या कहा?

ASML के प्रेसिडेंट और CEO क्रिस्टोफ फूके ने SEMICON India के दौरान कहा था कि भारत सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां निवेश, प्रतिभाशाली युवाओं और सरकार के स्पष्ट समर्थन ने वैश्विक उद्योग का ध्यान आकर्षित किया है।उन्होंने कहा था, “भारत का विजन वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग को और मजबूत करेगा। हम भारत के उद्योग को बेहतर तरीके से समझने, नए संबंध बनाने और भविष्य के अवसरों की तैयारी करने के लिए उत्साहित हैं।”

धोलरा फैब में इस्तेमाल होगी ASML तकनीक

इस साल जनवरी में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी वेल्डहोवन में ASML मुख्यालय पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि भारत में ASML की मौजूदगी एक बड़ा कदम होगी।वैष्णव ने बताया कि गुजरात के धोलरा में बन रही भारत की सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट (Fab) में ASML के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा।उन्होंने कहा था, “सेमीकंडक्टर निर्माण प्रक्रिया में लिथोग्राफी सबसे जटिल और अत्यधिक सटीक तकनीक है। इसलिए मैं यहां उनकी तकनीक को समझने आया हूं।”

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