रूस ने फिर दिखाया ओरेशनिक का दम, यूक्रेन पर हाइपरसोनिक प्रहार
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रूस ने फिर दिखाया ओरेशनिक का दम, यूक्रेन पर हाइपरसोनिक प्रहार

रूस ने यूक्रेन पर ओरेशनिक समेत हाइपरसोनिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया। इस मिसाइल की विनाशकारी क्षमता ने NATO और पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है।


23-24 मई की रात रूस ने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों पर एक समन्वित और विनाशकारी हमला किया। इस हमले में रूस ने ओरेशनिक (Oreshnik), इस्कंदर (Iskander), किंझाल (Kinzhal) और जिरकॉन (Zircon) जैसी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में हमलावर ड्रोन भी तैनात किए।

यूक्रेन की राजधानी कीव में अधिकारियों के अनुसार इस हमले में चार लोगों की मौत हो गई, लगभग 100 लोग घायल हुए और बिला त्सेरक्वा (सोवियत काल में बेलाया त्सेरकोव) क्षेत्र में नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।यह व्यापक हवाई हमला कथित तौर पर रूस-अधिकृत लुहान्स्क प्रांत में स्थित एक कॉलेज छात्रावास पर यूक्रेनी हमले के जवाब में किया गया। मॉस्को के अनुसार उस हमले में 21 छात्रों की मौत हुई थी और 42 अन्य घायल हुए थे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसके बाद बदला लेने की कसम खाई थी और सेना से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव मांगे थे।

रूस ने साफ तौर पर कहा कि उसने नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाया और अभियान केवल सैन्य बुनियादी ढांचे के खिलाफ था। फिर भी छात्रावास पर हुए हमले को लेकर रूस का गुस्सा उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों से स्पष्ट दिखाई दिया।इस्कंदर, किंझाल और जिरकॉन मिसाइलों का इस्तेमाल अब युद्ध का सामान्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चिंता और चर्चा का कारण बनी ओरेशनिक मिसाइल।

ओरेशनिक: उल्कापिंड जैसी विनाशकारी शक्ति

ओरेशनिक अपनी श्रेणी की एक अनोखी मिसाइल मानी जाती है। इसने दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है और पश्चिमी देशों के नीति-निर्माताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है।रूस द्वारा यह मिसाइल केवल तीसरी बार युद्ध में इस्तेमाल की गई है। इसकी विनाशकारी क्षमता इतनी अधिक बताई जाती है कि इसकी तुलना परमाणु हथियारों से की जाती है, हालांकि यह पारंपरिक हथियार है।

हाइपरसोनिक गति से उड़ने वाली यह मिसाइल सामान्य रडार प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम है। इसकी गति इतनी तेज होती है कि वायु रक्षा प्रणालियों को प्रतिक्रिया देने और इसे रोकने के लिए लगभग कोई समय नहीं मिलता।दुनिया ने पहली बार इस मिसाइल के बारे में 2024 के अंत में सुना था, जब इसने यूक्रेन के शहर ड्नीप्रो (पूर्व नाम ड्नीप्रोपेत्रोव्स्क) पर हमला किया था।

ड्नीप्रो पर हमला और नई सैन्य तकनीक का प्रदर्शन

21 नवंबर 2024 की सुबह ड्नीप्रो शहर पर अभूतपूर्व हवाई हमला किया गया। इस हमले ने युद्ध में पहले कभी न देखे गए हथियारों की एक नई श्रेणी को दुनिया के सामने पेश किया।इस ऑपरेशन में पहली बार MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) तकनीक वाली मिसाइल का उपयोग किया गया। यह ऐसी प्रणाली है जिसमें एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर स्वतंत्र रूप से हमला करने वाले वारहेड ले जा सकती है।सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आधुनिक युद्धकला में उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी 20वीं सदी के मध्य में बैलिस्टिक मिसाइलों का आगमन था।

युजमाश सैन्य परिसर को भारी नुकसान

हमले के दौरान ड्नीप्रो स्थित युजमाश (Yuzhmash) सैन्य उत्पादन परिसर पर आकाश से कई शक्तिशाली प्रहार हुए, जिससे बड़े विस्फोट हुए यूक्रेन ने सुरक्षा कारणों से नुकसान की वास्तविक जानकारी सार्वजनिक नहीं की, लेकिन विश्लेषकों का अनुमान है कि क्षति बेहद व्यापक थी।

लगभग एक वर्ग मील में फैला यह विशाल परिसर सोवियत काल में भूमिगत सुविधाओं के साथ बनाया गया था। विशेषज्ञों का दावा है कि हमले के बाद इसका बड़ा हिस्सा लंबे समय तक उपयोग के योग्य नहीं रहा।रूस ने इस हमले को अपनी नई मिसाइल की शक्ति का प्रदर्शन बताया, जबकि यूक्रेनी अधिकारियों ने कई दिनों तक इस विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की।ऊर्जा ढांचे पर हुए बड़े हमलों के कुछ दिनों बाद किए गए इस प्रहार को पुतिन ने "उल्कापिंड के बराबर शक्ति" वाला बताया था।

युद्ध की रणनीतियों को बदल सकती है ओरेशनिक

रूस ने ओरेशनिक को अपनी महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है।रूसी भाषा में "ओरेशनिक" का अर्थ हेज़ल (Hazel) वृक्ष होता है, जो विटामिन-ए से भरपूर मेवे देता है।यह प्रणाली एक रॉकेट वाहन या "बस" के रूप में काम करती है, जो कई अलग-अलग वारहेड को वायुमंडल की ऊंचाई तक ले जाती है। यह अवधारणा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) जैसी है।प्रत्येक MIRV छह उप-प्रक्षेपास्त्र (Submunitions) लेकर चलता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये अत्यंत घने और कठोर धातुओं जैसे टंगस्टन, टंगस्टन-टाइटेनियम मिश्रधातु, ऑस्मियम या रेनियम से बने हो सकते हैं।लक्ष्य से टकराने के समय इनकी गतिज ऊर्जा इतनी अधिक होती है कि वे विशाल संरचनाओं को भी नष्ट कर सकते हैं।

विश्लेषकों के अनुसार इनका प्रभाव लगभग 80 अमेरिकी मार्क-84 (MK-84) बमों के बराबर हो सकता है, जिनका इस्तेमाल वियतनाम युद्ध में किया गया था। हिरोशिमा पर गिराए गए "लिटिल बॉय" परमाणु बम की शक्ति लगभग 15 किलोटन थी, जबकि ओरेशनिक का एक प्रहार लगभग 0.8 किलोटन ऊर्जा के बराबर माना जाता है।

INF संधि और मिसाइल की सीमा

ओरेशनिक एक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) है। इसकी रेंज उन सीमाओं में आती है जिन्हें कभी अमेरिका और रूस के बीच हुई Intermediate-Range Nuclear Forces (INF) संधि के तहत नियंत्रित किया गया था।हालांकि, अमेरिका पहले ट्रंप प्रशासन के दौरान इस संधि से बाहर हो गया था।

रूस ने इस मिसाइल के इस्तेमाल से पहले अमेरिका को सूचित भी किया था कि इसमें परमाणु वारहेड नहीं है, ताकि किसी गलतफहमी के कारण परमाणु तनाव न बढ़े।

पश्चिमी विशेषज्ञों की मिलीजुली प्रतिक्रिया

पश्चिमी रक्षा विशेषज्ञों की राय इस मिसाइल को लेकर बंटी हुई है।कुछ वैज्ञानिकों ने दावा किया कि किसी मिसाइल का अंतिम चरण में मैक-10 से मैक-11 की गति बनाए रखना वैज्ञानिक रूप से बेहद कठिन है। उनके अनुसार वायुमंडल के निचले हिस्से में प्रवेश करते समय अत्यधिक घर्षण और तापमान मिसाइल की गति कम कर सकता है या उसे नष्ट कर सकता है।

कुछ विशेषज्ञों ने MIRV की सटीकता पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क है कि इतनी तेज गति से चलते समय मिसाइल के आसपास बनने वाला प्लाज्मा बादल मार्गदर्शन संकेतों को बाधित कर सकता है।हालांकि, युजमाश परिसर की हमले के बाद की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की गईं, जिससे वास्तविक क्षति का स्वतंत्र आकलन करना मुश्किल है।फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि 36 प्रक्षेपास्त्रों के संयुक्त प्रभाव ने इस सुविधा को लंबे समय के लिए निष्क्रिय कर दिया होगा।

रूस का ‘प्रतिशोधी हथियार’

विश्लेषकों के अनुसार ओरेशनिक का मुख्य उद्देश्य परमाणु हमला करना नहीं, बल्कि अत्यधिक सुरक्षित और बहु-स्तरीय कंक्रीट संरचनाओं को नष्ट करना है।यह भूमिगत सैन्य कारखानों, मिसाइल साइलो, कमांड सेंटर और सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है।रूस अब तक इस मिसाइल का सीमित उपयोग करता रहा है। आमतौर पर इसका इस्तेमाल उन घटनाओं के जवाब में किया जाता है जिन्हें मॉस्को अपने नागरिक ढांचे पर हमला मानता है, या फिर पश्चिमी देशों को चेतावनी देने के लिए।

जब भी पश्चिमी देश यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें, जैसे जर्मन टॉरस KEPD-350, या अत्याधुनिक टैंक देने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, रूस ओरेशनिक के जरिए शक्ति प्रदर्शन करता है।जनवरी 2026 में यूरोपीय संघ के नेताओं द्वारा यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य सहायता देने की घोषणा के बाद रूस ने दूसरी बार ओरेशनिक का इस्तेमाल किया था। उस दौरान पश्चिमी यूक्रेन के ल्वीव क्षेत्र के पास एक विमान मरम्मत संयंत्र और बिल्चे-वोलित्स्को-उहेर्स्के स्थित भूमिगत गैस भंडारण केंद्र को निशाना बनाया गया था।

इस प्रकार, ओरेशनिक केवल एक नई मिसाइल नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और भविष्य की सैन्य रणनीतियों का संकेत मानी जा रही है।

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