
भारतीय टैंकर पर हमले से भड़का भारत, जयशंकर ने रूबियो को सुनाई दो टूक
भारतीय नाविकों वाले टैंकर पर हमले के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बात कर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
पश्चिमी एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत ने व्यापारिक जहाजों पर हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से बातचीत कर समुद्र में भारतीय नाविकों से जुड़े तेल टैंकर पर हुए हमले पर गंभीर चिंता जताई है।
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने मार्को रूबियो से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वाणिज्यिक जहाजों पर किसी भी प्रकार का हमला स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चलने वाले कमर्शियल जहाजों को किसी भी हाल में निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
भारतीय चालक दल को हुआ नुकसान
जानकारी के अनुसार, हाल ही में ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर हमला हुआ था, जिसमें भारतीय नाविक भी सवार थे। हमले के बाद चालक दल के तीन भारतीय सदस्य लापता हो गए थे। बाद में उनके निधन की पुष्टि की गई।केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि मृतकों की पहचान डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और चीफ इंजीनियर पट्नाला सुरेश के रूप में हुई है।
किस जहाज पर हुआ था हमला?
बताया गया कि हमला पलाऊ ध्वज वाले एक तेल टैंकर पर हुआ था, जो ओमान की खाड़ी से गुजर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय और चार विदेशी नागरिक शामिल थे। विदेशी नागरिकों में दो पाकिस्तानी, एक रूसी और एक यूक्रेनी नागरिक था।
घटना के बाद बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया। हालांकि तीन भारतीय नाविकों की मौत की पुष्टि बाद में की गई।
अमेरिका ने स्वीकार की कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया कि उसकी सेना ने संबंधित टैंकर को निशाना बनाया था। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि जहाज का चालक दल अमेरिकी नौसैनिकों के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था, जिसके बाद कार्रवाई की गई।हालांकि भारत ने इस घटना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर इस प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
क्षेत्र में बढ़ा समुद्री तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास का क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ऐसे में समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग गतिविधियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। भारत ने स्पष्ट किया है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

