
ईरान ने दी फिर से युद्ध की चेतावनी, ट्रंप ने ठुकराया शांति प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने की अपनी कसम दोहराते हुए उसे 'पागलों का देश' करार दिया है। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की 'टोल वसूली' को रोकने के लिए वैश्विक शिपिंग कंपनियों को सख्त प्रतिबंधों की चेतावनी दी है।
मध्य पूर्व में युद्ध की लपटें एक बार फिर तेज होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपने हमले तेज करते हुए उसे "पागलों का समूह" करार दिया है और स्पष्ट किया है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। इसके साथ ही, अमेरिका ने दुनिया भर की शिपिंग कंपनियों को चेतावनी जारी की है कि यदि वे सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान को किसी भी प्रकार का भुगतान करती हैं, तो उन्हें कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: 'टोल बूथ' और प्रतिबंधों का खतरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा युद्ध शुरू करने के बाद ईरान ने इस जलडमरूमध्य को सामान्य यातायात के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया था।
खबरों के अनुसार, ईरान अब जहाजों को अपने तट के करीब वैकल्पिक मार्गों से सुरक्षित रास्ता देने के बदले 'टोल टैक्स' वसूलने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (OFAC) ने इसे "टोल बूथ" प्रयास करार दिया है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यह भुगतान चाहे नकद में हो, डिजिटल संपत्ति (क्रिप्टो), उपहार या चैरिटी के रूप में, इसे प्रतिबंधों का उल्लंघन माना जाएगा। OFAC ने स्पष्ट किया है कि ईरानी दूतावासों के माध्यम से किया गया भुगतान भी जांच के दायरे में आएगा।
ट्रंप की 'पायरेट' टिप्पणी और सख्त रुख
फ्लोरिडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "हम एक युद्ध में हैं क्योंकि मुझे लगता है कि आप भी इस बात से सहमत होंगे कि हम पागलों (Lunatics) के पास परमाणु हथियार नहीं रहने दे सकते।" ट्रंप ने ईरान द्वारा पाकिस्तान के जरिए भेजे गए शांति प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि वे इस सौदे से संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को "बिखरा हुआ और उलझा हुआ" बताया। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई की तुलना 'समुद्री डाकुओं' (Pirates) से करते हुए कहा, "हम जहाजों पर उतरते हैं, उन पर कब्जा करते हैं और उनके तेल को जब्त कर लेते हैं। यह एक बहुत ही फायदेमंद व्यवसाय है। हम समुद्री डाकुओं की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन हम कोई खेल नहीं खेल रहे हैं।" समुद्री नाकाबंदी और आर्थिक दबाव
13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी कर रखी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस नाकाबंदी के शुरू होने के बाद से अब तक 45 कमर्शियल जहाजों को वापस लौटाया जा चुका है। इसका उद्देश्य ईरान के तेल राजस्व को पूरी तरह रोकना है, जो उसकी गिरती अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन का काम करता है। अमेरिका का तर्क है कि जब तक ईरान अपनी परमाणु और मिसाइल गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाता, तब तक उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनुमति नहीं दी जा सकती।
ईरान की जवाबी तैयारी: 'युद्ध की संभावना बरकरार'
ट्रंप द्वारा शांति प्रस्ताव ठुकराए जाने के कुछ ही घंटों बाद, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मोहम्मद जाफर असादी ने कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के फिर से शुरू होने की "पूरी संभावना" है। उन्होंने कहा, "ईरान अमेरिकियों के किसी भी नए दुस्साहस या मूर्खता के लिए पूरी तरह तैयार है। सबूत बताते हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका किसी भी वादे या समझौते के प्रति प्रतिबद्ध नहीं है।"
सफेद सदन का विरोधाभासी पत्र
एक ओर जहाँ ट्रंप रैलियों में युद्ध और आक्रामक कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर व्हाइट हाउस ने कांग्रेस को लिखे एक पत्र में कहा है कि ईरान के साथ शत्रुता (Hostilities) "समाप्त" हो गई है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए संघर्ष के संदर्भ में ट्रंप ने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन को लिखा कि ऑपरेशन सफल रहे हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि ईरानी शासन से खतरा अभी भी बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह पत्र कानूनी औपचारिकताओं के लिए हो सकता है, जबकि जमीन पर स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण है। अमेरिकी सेना अभी भी इस क्षेत्र में भारी संख्या में तैनात है और किसी भी बड़े टकराव के लिए तैयार है।

