ट्रंप का कड़ा रुख: 13 लाख अप्रवासियों पर मंडराया डिपोर्टेशन का खतरा
x

ट्रंप का कड़ा रुख: 13 लाख अप्रवासियों पर मंडराया डिपोर्टेशन का खतरा

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप प्रशासन की दोटूक, कहा- टीपीएस (TPS) खत्म करने के हमारे फैसले में अदालतें दखल नहीं दे सकतीं। हैती और सीरियाई नागरिक रडार पर।


Trump Administration Vs US Supreme Court : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रवासियों को डिपोर्टेशन से बचाने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अदालत से स्पष्ट कहा है कि न्यायालय उनके प्रशासन द्वारा लिए गए टीपीएस (TPS) संबंधी निर्णयों की समीक्षा नहीं कर सकता। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि कानून सचिव को यह अधिकार देता है कि वह बिना किसी अदालती हस्तक्षेप के प्रवासियों का कानूनी दर्जा समाप्त कर सके।

लाखों अप्रवासियों पर लटकी तलवार

न्यूयॉर्क और वाशिंगटन डी.सी. के संघीय न्यायाधीशों ने फिलहाल प्रशासन को हैती के 3.5 लाख और सीरिया के 6,000 नागरिकों का कानूनी दर्जा छीनने से रोक रखा है। प्रशासन का कहना है कि इन देशों में हिंसा और आतंकवाद चरम पर है, इसलिए वहाँ की यात्रा असुरक्षित है। हालांकि, जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के बाद से ही ट्रंप वैध और अवैध आप्रवासन पर व्यापक कार्रवाई कर रहे हैं।

क्या है टीपीएस और क्यों है विवाद?

1990 के इमिग्रेशन अधिनियम के तहत टीपीएस (अस्थायी संरक्षित स्थिति) उन लोगों को मिलती है जिनके गृह देश युद्ध या प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं। यह उन्हें अमेरिका में रहने और काम करने का कानूनी हक देता है। वादियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने अब तक 17 में से 13 देशों के लिए यह सुरक्षा समाप्त करने की मांग की है, जिससे लगभग 13 लाख अप्रवासी प्रभावित होंगे।

अदालतें और प्रोटोकॉल का मामला

निचली अदालतों ने ट्रंप प्रशासन के फैसलों के खिलाफ फैसला सुनाया है। अदालतों का मानना है कि अधिकारियों ने किसी देश का पदनाम रद्द करने से पहले जरूरी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। इमिग्रेशन अधिनियम के तहत स्थिति का सही आकलन करना अनिवार्य है। हालांकि, ट्रंप का न्याय विभाग इन दलीलों को खारिज करते हुए राष्ट्रपति की शक्तियों को व्यापक और न्यायिक क्षेत्राधिकार को सीमित बताने पर जोर दे रहा है।

वकीलों ने बताया कानून पर हमला

सीरियाई टीपीएस लाभार्थियों के वकील अहिलन अरुलानंथम ने इस कानूनी लड़ाई को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि सरकार की बात मानी गई, तो प्रशासन पूरी तरह से मनमाने कारणों से किसी भी देश का टीपीएस समाप्त कर सकेगा। उन्होंने इसे कांग्रेसी कानून पर एक सुनियोजित हमला करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम किसी संघीय एजेंसी के तर्कसंगत निर्णय को नहीं दर्शाता।

जून तक आ सकता है फैसला

वर्तमान में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 6-3 का रूढ़िवादी बहुमत है, जो अक्सर ट्रंप की कड़ी इमिग्रेशन नीतियों के पक्ष में रहा है। कोर्ट ने पहले ही ट्रंप को उन देशों में भी प्रवासियों को निर्वासित करने की अनुमति दी है जहाँ उनका कोई संबंध नहीं है। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर हैं, जिसकी उम्मीद जून के अंत तक की जा रही है। यह फैसला लाखों परिवारों का भविष्य तय करेगा।

Read More
Next Story