
ट्रंप ने इजरायल को बताया महान सहयोगी, होर्मुज पर ईरान के साथ तनाव बढ़ा
डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की वफादारी को सराहा, वहीं ईरान ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने का ऐलान किया है।
US Vs Iran : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच इजरायल की जमकर तारीफ की है। ट्रंप ने इजरायल को अमेरिका का एक "महान सहयोगी" बताते हुए उसके साहस और वफादारी की सराहना की। हालांकि, एक तरफ जहाँ ट्रंप इजरायल का मनोबल बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के साथ उनका गतिरोध और गहरा गया है।
"इजरायल लड़ना और जीतना जानता है": डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि लोग इजरायल को पसंद करें या न करें, लेकिन उसने खुद को अमेरिका का एक बेहतरीन सहयोगी साबित किया है। ट्रंप ने लिखा, "इजरायल साहसी, निडर, वफादार और समझदार है। उन लोगों के विपरीत जिन्होंने संकट के समय अपना असली रंग दिखाया, इजरायल डटकर लड़ता है और जीतना जानता है।" दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह बयान उनके उस निर्देश के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने इजरायल को लेबनान पर बमबारी रोकने के लिए कहा था।
ईरान की दोटूक: नाकेबंदी हटने तक बंद रहेगा होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी सस्पेंस अब पूरी तरह तनाव में बदल चुका है। ईरान ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि जब तक अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक यह रणनीतिक मार्ग बंद रहेगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर घलीबाफ ने कहा कि हालांकि वाशिंगटन के साथ बातचीत में "प्रगति" हुई है, लेकिन अंतिम शांति समझौते तक पहुंचना अभी बहुत दूर की बात है।
सीजफायर पर सस्पेंस और तेल बाजार में हलचल
इजरायल और ईरान के बीच जारी दो हफ्ते का युद्धविराम आगामी बुधवार को समाप्त होने वाला है। इससे पहले शुक्रवार को खबर आई थी कि लेबनान में सीजफायर के बाद होर्मुज को खोल दिया गया है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट भी देखी गई थी। लेकिन ट्रंप के अड़ियल रुख और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने के बयान के बाद तेहरान ने फिर से रास्ता बंद करने का ऐलान कर दिया। होर्मुज से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है, ऐसे में इसकी नाकेबंदी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।
28 फरवरी से दहक रहा है पश्चिम एशिया
इस बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से हुई थी। इसके बाद जंग पूरे क्षेत्र में फैल गई, जिसमें ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे और खाड़ी देश भी इसकी चपेट में आ गए। फिलहाल सबकी निगाहें बुधवार पर टिकी हैं, जब मौजूदा सीजफायर की अवधि खत्म होगी। अगर समझौता आगे नहीं बढ़ता, तो क्षेत्र में एक बार फिर बड़े युद्ध की आशंका प्रबल हो जाएगी।
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