ईरान से डील अटकी, कच्चे तेल में उबाल; अब जेब पर भारी पड़ेंगे ट्रंप!
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सांकेतिक चित्र।

ईरान से डील अटकी, कच्चे तेल में उबाल; अब जेब पर भारी पड़ेंगे ट्रंप!

ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक तेहरान परमाणु हथियारों को पूरी तरह त्यागने की गारंटी नहीं देता, तब तक कोई कूटनीतिक डील संभव नहीं है...


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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त 'परमाणु रुख' के कारण ईरान के साथ होने वाला संभावित समझौता अधर में लटक गया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक तेहरान परमाणु हथियारों को पूरी तरह त्यागने की गारंटी नहीं देता, तब तक कोई कूटनीतिक डील संभव नहीं है। इस तनातनी ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है, जिससे भारत सहित दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है।

क्या है ट्रंप की वह 'एक डिमांड' जिसने बढ़ाई टेंशन?

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के सामने एक कड़ी शर्त रखी है कि "परमाणु हथियार नहीं तो कोई डील नहीं।" उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जब तक ईरान लिखित गारंटी नहीं देता कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, तब तक अमेरिका प्रतिबंधों या नाकेबंदी में कोई ढील नहीं देगा।

हालांकि ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण ऊर्जा उद्देश्यों के लिए है। लेकिन ट्रंप प्रशासन को संदेह है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु बम बनाने की राह पर है। ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को खोलने और युद्ध समाप्त करने का प्रस्ताव तो दिया लेकिन परमाणु मुद्दे को भविष्य के लिए टालने की कोशिश की, जिसे ट्रंप ने सिरे से ठुकरा दिया है।

कच्चे तेल के बाजार में कोहराम: रिकॉर्ड स्तर पर कीमतें

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है...

ब्रेंट क्रूड का उछाल: बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6% की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह 122 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह जून 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।

WTI क्रूड का हाल: वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) तेल भी लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।

सप्लाई शॉक: इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा 'सप्लाई शॉक' करार दिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाजार को लगभग 1 अरब बैरल तेल का नुकसान हो रहा है।

रणनीतिक घेराबंदी: अमेरिका की सैन्य तैयारी

ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है...

सैन्य नाकेबंदी: ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि परमाणु समझौते तक ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) नए सैन्य विकल्पों पर काम कर रहा है।

हाइपरसोनिक मिसाइलें: पहली बार मध्य पूर्व में अमेरिकी 'हाइपरसोनिक मिसाइलों' की तैनाती की मांग की गई है।

टैंकरों की जब्ती: अमेरिका उन तेल टैंकरों को जब्त करने की प्रक्रिया में है जिन्हें नाकेबंदी के दौरान पकड़ा गया था। अप्रैल के मध्य से अब तक दर्जनों जहाजों को वापस लौटाया जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय गठबंधन: 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका अन्य देशों के साथ मिलकर एक वैश्विक गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है।

ईरान का कड़ा रुख और होर्मुज का संकट

ईरान के सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो ईरान इसका करारा जवाब देगा। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज', जो दुनिया की तेल सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, फरवरी से प्रभावी रूप से बंद है। इसके कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं।

इस बीच, खरीदार अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में हैं। अमेरिकी कच्चे तेल का निर्यात रिकॉर्ड 60 लाख बैरल प्रतिदिन के पार पहुंच गया है। क्योंकि दुनिया भर के देश मध्य पूर्व के बजाय अमेरिका से तेल खरीद रहे हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था और आपकी जेब पर क्या होगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा आयात करता है। ट्रंप और ईरान के बीच यह गतिरोध भारत के लिए सीधा खतरा है...

महंगा आयात: अगर वैश्विक बाजार में तेल महंगा होता है तो भारतीय तेल कंपनियों को अधिक भुगतान करना पड़ेगा।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें: कच्चे तेल की लागत बढ़ने का सीधा बोझ पेट्रोल पंपों पर आम जनता पर डाला जा सकता है।

महंगाई का चक्र: ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई (Transportation) की लागत बढ़ेगी, जिससे फल, सब्जियां और राशन जैसी जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं।

फिलहाल कूटनीतिक गेंद ट्रंप के पाले में है। यदि परमाणु गतिरोध का जल्द समाधान नहीं निकलता और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' बंद रहता है तो भारत को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़े झटके के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि ट्रंप का दावा है कि यदि डील हो जाती है तो तेल की कीमतें ऐतिहासिक रूप से नीचे आ जाएंगी।

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