तुलसी गबार्ड का बड़ा दावा: डॉ फाउची ने वुहान लैब को दी थी कोरोना फंडिंग
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तुलसी गबार्ड का बड़ा दावा: डॉ फाउची ने वुहान लैब को दी थी कोरोना फंडिंग

निवर्तमान US DNI तुलसी गबार्ड ने गोपनीय दस्तावेज जारी कर दावा किया कि डॉ फाउची ने वुहान लैब में खतरनाक वायरस रिसर्च को फंड किया और संसद से झूठ बोला।


Wuhan US Nexus: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस (DNI) की निवर्तमान निदेशक तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक बहुत बड़ा राजनीतिक और वैज्ञानिक विस्फोट किया है। गबार्ड ने कुछ ऐसे गुप्त दस्तावेज और कम्युनिकेशन्स सार्वजनिक किए हैं, जो सीधे तौर पर जो बाइडन के पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथनी फाउची को कटघरे में खड़ा करते हैं। गबार्ड का दावा है कि डॉ. फाउची ने अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर चीन की उसी विवादित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) को दिए थे, जिसे कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत का केंद्र माना जाता है।


खतरनाक 'गैन-ऑफ-फंक्शन' रिसर्च को दी फंडिंग
तुलसी गबार्ड के कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 85 वर्षीय डॉ. एंथनी फाउची ने चमगादड़ कोरोना वायरस पर बेहद खतरनाक 'गैन-ऑफ-फंक्शन' (Gain-of-Function) रिसर्च के लिए अमेरिकी जनता के पैसों से लाखों डॉलर की फंडिंग की थी। 'गैन-ऑफ-फंक्शन' एक ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें किसी वायरस को जानबूझकर अधिक संक्रामक या घातक बनाया जाता है ताकि भविष्य की महामारियों का अध्ययन किया जा सके। गबार्ड का आरोप है कि फाउची ने बड़ी फार्मा कंपनियों के फायदों और ट्रिलियन डॉलर के 'यूनिवर्सल वैक्सीन' बाजार को चमकाने के लिए इस जोखिम भरे रिसर्च को बढ़ावा दिया।

'लैब-लीक' थ्योरी को दबाने के लिए रचा चक्रव्यूह
दस्तावेजों के हवाले से खुफिया प्रमुख ने आरोप लगाया कि जब साल 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी फैली, तो फाउची ने अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी (खुफिया तंत्र) के कुछ राजनीतिकरण वाले अधिकारियों के साथ मिलकर 'लैब-लीक थ्योरी' को दबाने की पूरी कोशिश की।

बयान के मुख्य अंश: "डॉ. फाउची ने खुफिया आकलन को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए एक 'सर्कुलर रिपोर्टिंग लूप' तैयार किया। उन्होंने खुद के द्वारा फंडेड वैज्ञानिकों को ही खुफिया एजेंसियों का सलाहकार बना दिया। इसके बाद इन वैज्ञानिकों से अपनी मर्जी की रिपोर्ट तैयार करवाई और उसे 'वैज्ञानिक आम सहमति' (Scientific Consensus) बताकर दुनिया के सामने परोसा, ताकि लैब-लीक के सच को छुपाया जा सके।"

गबार्ड ने कहा कि फाउची ने खुद एक 'फर्जी रिसर्च पेपर' को बढ़ावा दिया, जिसे उन्होंने खुद तैयार करवाया था, ताकि खुफिया एजेंसियां प्राकृतिक रूप से वायरस के फैलने (जानवरों से इंसानों में) की थ्योरी को ही सच मानें।

'फाउची ने अमेरिकी संसद से बोला झूठ'
तुलसी गबार्ड ने सीधे शब्दों में कहा कि डॉ. फाउची ने जून 2024 में अमेरिकी संसद की सुनवाई के दौरान शपथ लेकर झूठ बोला था। उस समय फाउची से बार-बार पूछा गया था कि क्या उन्होंने महामारी के पहले या बाद में कभी भी FBI, CIA या किसी अन्य खुफिया एजेंसी से वायरस रिसर्च को लेकर बात की थी? तब फाउची ने सवालों से बचते हुए कहा था—"मेरी जानकारी में तो ऐसा नहीं हुआ।"

लेकिन गबार्ड के पास मौजूद नए दस्तावेजों और कई व्हिसलब्लोअर्स (भेदियों) की गवाही से पता चला है कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने फाउची की थ्योरी को चुनौती देने की कोशिश की, उन्हें करियर बर्बाद करने की धमकियां दी गईं, साइडलाइन किया गया और उनका दमन किया गया।

'डीप स्टेट' के हथकंडों का इस्तेमाल
गबार्ड ने अमेरिकी जनता के सामने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि फाउची ने जो कुछ भी किया, वह 'डीप स्टेट' (Deep State- पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाला तंत्र) की गाइडबुक से लिया गया था। उन्होंने खुद की गलतियों और शक्तियों के दुरुपयोग को छिपाने के लिए न केवल झूठ बोला, बल्कि एक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति (तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) तक महत्वपूर्ण तथ्यों की पहुंच को रोक दिया, जिससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ी।

बता दें कि तुलसी गबार्ड ने पिछले महीने ही अपने बीमार पति की देखभाल के लिए ट्रंप प्रशासन के खुफिया प्रमुख के पद से इस्तीफा देने का फैसला किया था, और 18 जून (गुरुवार) को उनके दफ्तर का आखिरी दिन था। फिलहाल इन गंभीर आरोपों पर डॉ. एंथनी फाउची की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


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