
यूएई की नई कूटनीति से मची खलबली, OPEC से किनारा
ओपेक से अलग होकर यूएई तेल पर निर्भरता घटाते हुए वैश्विक व्यापार, तकनीक और कूटनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) खाड़ी क्षेत्र का एकमात्र ऐसा देश है, जहां व्यावसायिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र सक्रिय रूप से काम कर रहा है। अबू धाबी स्थित बराकाह परमाणु संयंत्र 5600 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है, जो देश की कुल ऊर्जा जरूरत का लगभग 25 प्रतिशत पूरा करता है। इसके अलावा, अबू धाबी ने सांस्कृतिक क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है, जहां विश्व प्रसिद्ध फ्रांसीसी कला संग्रहालय ‘लूव्र’ की शाखा स्थापित की गई है।
ओपेक से बाहर निकलने का फैसला
संयुक्त अरब अमीरात का तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) से बाहर निकलने का फैसला तेल उपभोग करने वाले देशों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। लंबे समय से यह धारणा रही है कि तेल उत्पादक देशों का यह समूह वैश्विक निर्भरता का फायदा उठाकर अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करता है।
1973 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान ओपेक देशों ने तेल की कीमतों को बढ़ाकर इसे एक तरह के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया था। ऐसे में यूएई का ओपेक से अलग होना इस संगठन की ताकत में कमी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे ओपेक की वैश्विक सौदेबाजी क्षमता पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि पिछले दो दशकों में यह संगठन राजनीतिक समूह से अधिक आर्थिक लॉबी के रूप में काम करता रहा है।
यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल-मजरूई ने इस फैसले को एक “नीतिगत निर्णय” बताया है, जो वर्तमान और भविष्य की उत्पादन नीतियों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
यूएई और सऊदी अरब के बीच प्रतिस्पर्धा
खाड़ी देशों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा भी इस फैसले के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। खासकर यूएई और सऊदी अरब के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं, जैसे यमन संघर्ष।
यूएई ने खुद को एक अलग पहचान देने में सफलता हासिल की है। दुबई आज एक वैश्विक व्यापारिक केंद्र बन चुका है, जहां यूरोप, एशिया और अफ्रीका के लोग व्यापार और निवेश के लिए आते हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने हाल के वर्षों में वैश्वीकरण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और खुद को सांस्कृतिक और मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रहा है।हालांकि, दुबई अभी भी विदेशी निवेश और जीवनशैली के मामले में अन्य खाड़ी शहरों से आगे है। कतर की राजधानी दोहा ने 2022 फीफा विश्व कप की मेजबानी कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन दुबई की वैश्विक पहचान अब भी मजबूत बनी हुई है।
तेल से आगे की सोच
यूएई दुनिया का प्रमुख तेल उत्पादक देश है और उत्पादन के मामले में सऊदी अरब, इराक और ईरान के बाद चौथे स्थान पर आता है। लेकिन यूएई अब केवल तेल पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह अपनी अर्थव्यवस्था को विविधता देने और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
दुबई को दुनिया के शीर्ष 10 शहरों में शामिल किया जाता है। यह वेस्ट एशिया में ग्लोबल पावर सिटी इंडेक्स में पहले स्थान पर है और वैश्विक स्तर पर आठवें स्थान पर है। साथ ही, यह स्मार्ट सिटी इंडेक्स में भी शीर्ष शहरों में शामिल है।
वैश्विक मंच पर यूएई की भूमिका
यूएई अब खुद को वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, रूस, भारत और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है।यूक्रेन युद्ध के दौरान, जब रूस पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तब यूएई ने एशियाई बाजारों जिसमें भारत भी शामिल है में रूसी तेल की बिक्री में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के साथ यूएई के संबंध भी तेजी से मजबूत हो रहे हैं, जबकि सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते किए हैं।
भविष्य की रणनीति
यूएई खुद को पश्चिम एशिया का “सिंगापुर” बनाना चाहता है। इसके लिए उसने आधुनिक बुनियादी ढांचा, वैश्विक व्यापार माहौल और बहुसांस्कृतिक समाज का निर्माण किया है।हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यूएई अपने इस लक्ष्य को पूरी तरह हासिल कर पाएगा या नहीं, लेकिन उसने उस दिशा में मजबूत आधार जरूर तैयार कर लिया है।

