
ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध खत्म होने के करीब, जानिए क्या है 14 सूत्रीय मेमो के अंदर?
अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनने की खबर है। अगर यह समझौता होता है, तो Strait of Hormuz के रास्ते फिर से खुल सकते हैं।
पश्चिम एशिया (Middle East) में पिछले कई महीनों से जारी खूनी संघर्ष के बीच शांति की एक बड़ी उम्मीद जगी है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब पहुँच गए हैं। अगर यह समझौता होता है, तो न केवल इस युद्ध पर विराम लगेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रास्ते भी फिर से खुल सकते हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू
एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के अनुसार, दो अमेरिकी अधिकारियों और मामले से जुड़े अन्य सूत्रों ने पुष्टि की है कि दोनों देश एक पन्ने के समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनाने के बहुत करीब हैं। यह युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी प्रगति मानी जा रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी बुधवार को पुष्टि की है कि वे अमेरिका द्वारा भेजे गए नए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं।
क्या है इस 1 पन्ने के 'मेमो' में?
इस संभावित समझौते को 14-सूत्रीय मेमो के रूप में देखा जा रहा है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-
परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान अपने परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) पर एक अस्थायी रोक या 'मोरेटोरियम' लगाने के लिए सहमत होगा।
प्रतिबंधों से राहत: इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों को हटाएगा और विदेशों में जमी (Frozen) ईरान की अरबों डॉलर की धनराशि को रिहा करेगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का रास्ता: दोनों पक्ष होर्मुज़ जलडमरूमध्य से पारगमन (Transit) पर लगे प्रतिबंधों और नाकेबंदी को हटाएंगे। वर्तमान में इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, जबकि दुनिया का लगभग 20% ऊर्जा तेल यहीं से गुजरता है।
युद्ध की समाप्ति: इस मेमो के लागू होते ही क्षेत्र में चल रही सैन्य कार्रवाइयां तुरंत बंद हो जाएंगी।
संवर्धन पर रोक: 12 साल या 20 साल?
समझौते में सबसे पेचीदा मुद्दा यूरेनियम संवर्धन पर रोक की अवधि है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने 20 साल की अवधि की मांग की थी, जबकि ईरान केवल 5 साल के लिए तैयार था। अब 12 से 15 साल की अवधि के बीच समझौता होने की संभावना जताई जा रही है। अमेरिका ने यह शर्त भी रखी है कि अगर ईरान इस रोक का उल्लंघन करता है, तो यह अवधि और बढ़ा दी जाएगी।
ट्रम्प के दूत संभाल रहे हैं कमान
इस गुप्त और महत्वपूर्ण बातचीत का नेतृत्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खास दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर कर रहे हैं। ये दोनों ईरानी अधिकारियों के साथ सीधे और मध्यस्थों (जैसे पाकिस्तान) के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं। समझौते के तहत, युद्ध रुकने के बाद 30 दिनों का समय दिया जाएगा ताकि होर्मुज़ को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं पर एक अंतिम और विस्तृत समझौता किया जा सके।
अभी भी संशय के बादल
इतनी प्रगति के बावजूद, व्हाइट हाउस के भीतर अभी भी कुछ अधिकारी इस समझौते को लेकर आशंकित हैं। अमेरिका को लगता है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर आपसी मतभेद हैं, जिससे अंतिम सहमति बनाना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, ईरान के सांसद इब्राहिम रज़ाई ने इस प्रस्ताव को अमेरिका की 'विश लिस्ट' (Wish List) बताया है। उनका कहना है कि जो अमेरिका युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर पाया, वह बातचीत की मेज पर हासिल करना चाहता है।
अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। अमेरिका को उम्मीद है कि ईरान इस मेमो के प्रमुख बिंदुओं पर अपना जवाब भेज देगा। यदि यह डील सफल रहती है, तो यह डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति की एक बहुत बड़ी जीत होगी और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।

