अमेरिका-ईरान समझौते से थमेगा तेल संकट, 30 दिन क्यों हैं अहम?
x

अमेरिका-ईरान समझौते से थमेगा तेल संकट, 30 दिन क्यों हैं अहम?

अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद बढ़ी है। इससे तेल आपूर्ति को राहत मिलेगी, लेकिन परमाणु समेत कई विवादित मुद्दे अभी बाकी हैं।


अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार (19 जून) को जिनेवा में एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। माना जा रहा है कि यह समझौता वैश्विक तेल आपूर्ति में संभावित बाधाओं को लेकर तत्काल चिंताओं को कम कर सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मौजूद सबसे जटिल और संवेदनशील मुद्दों को भविष्य की वार्ताओं के लिए छोड़ दिया गया है।

पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से तैयार हुए इस समझौते के तहत अगले 30 दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोले जाने की उम्मीद है। साथ ही, अगले दो महीनों तक दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत के लिए एक ढांचा भी तैयार किया गया है। जिनेवा स्थित व्यापार विशेषज्ञ डी. रवि कंथ के अनुसार, समझौता लगभग तय हो चुका है और अब केवल उस पर औपचारिक हस्ताक्षर होना बाकी है। उन्होंने बताया कि हस्ताक्षर से पहले कतर में भी दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत जारी रह सकती है।

तनाव कम करने पर जोर, विवादों का समाधान नहीं

इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका उद्देश्य विवादों का स्थायी समाधान निकालना नहीं, बल्कि तनाव कम करना है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी बहाल की जाएगी और ईरान को कुछ आर्थिक राहत तथा प्रतिबंधों में छूट मिल सकती है। वहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों को वार्ता के दूसरे चरण के लिए टाल दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल बाजारों में हालिया गिरावट और स्थिरता की वजह भी यही है। निवेशक फिलहाल तेल आपूर्ति में संभावित संकट के खतरे के कम होने को सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं, न कि अमेरिका और ईरान के बीच पूर्ण सामान्य संबंधों की उम्मीद के रूप में।

30 दिनों में खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य

रवि कंथ ने कहा कि अगले 30 दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए दोनों पक्ष समुद्री मार्गों में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के कदम उठाएंगे।होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इसके खुलने से विशेष रूप से एशियाई देशों को राहत मिल सकती है, जो तेल आयात पर काफी निर्भर हैं।

तेल कीमतों में आ सकती है स्थिरता

रवि कंथ के अनुसार, यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हो सकती हैं। इसके अलावा, प्रतिबंधों में ढील मिलने पर ईरान के तेल निर्यात में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

समझौते की स्थिरता पर सवाल

हालांकि, विशेषज्ञ इस समझौते को स्थायी शांति की गारंटी नहीं मान रहे हैं। रवि कंथ का कहना है कि फिलहाल इस समझौते के भविष्य को लेकर कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, पहली नजर में यह ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सफलता दिखाई देती है, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है।

आने वाले चरण में अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु गतिविधियों जैसे पुराने विवादित मुद्दों पर कठिन बातचीत होने की संभावना है। रवि कंथ ने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने अधिकतम हितों की रक्षा करने की कोशिश करेंगे, जिससे आगे की वार्ताएं और जटिल हो सकती हैं।

ऊर्जा आपूर्ति बहाली पर फिलहाल फोकस

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल दोनों देशों का ध्यान ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक सप्लाई चेन को सामान्य बनाने पर है। रवि कंथ ने कहा कि अगले 30 दिनों में तेल और गैस की आपूर्ति से जुड़ी गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय होने लगेंगी, लेकिन पूर्ण सामान्य स्थिति बनने में अभी समय लगेगा।इसलिए फिलहाल बाजारों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह अंतरिम समझौता आगे चलकर एक स्थायी राजनीतिक समाधान का रूप ले पाता है या नहीं।

Read More
Next Story