
अमेरिका का ईरान पर दबाव, न्यूक्लियर प्लांट बंद करने और यूरेनियम की मांग
यूएस-ईरान वार्ता में अमेरिका का बड़ा रुख। प्रतिबंधों के नुकसान का मुआवजा देने और फ्रीज फंड लौटाने से किया इनकार। ईरान ने दी और भीषण सैन्य हमले की चेतावनी।
USA Iran War : पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल को हुए संघर्षविराम के बाद चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बीच अमेरिका ने ईरान के सामने पांच बड़ी और सख्त शर्तें रख दी हैं। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉशिंगटन ने पिछले प्रतिबंधों और नीतियों के कारण ईरान को हुए आर्थिक नुकसान का कोई भी मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया है। इसके अलावा, अमेरिका ने बातचीत के तहत ईरान से अपना 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) अमेरिका को सौंपने की मांग की है। इस कड़े रुख के बाद दोनों देशों के बीच पहले से ही जारी सैन्य और रणनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच सकता है।
यूएस ने खारिज की फ्रीज फंड्स लौटाने की मांग, केवल एक न्यूक्लियर प्लांट चलाने की शर्त
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की विदेशों में फ्रीज पड़ी संपत्तियों का 25 प्रतिशत हिस्सा भी रिलीज करने से मना कर दिया है। अमेरिकी प्रस्ताव में यह शर्त भी जोड़ी गई है कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों में से केवल एक ही सेट चालू रहने दिया जाएगा। इसके साथ ही, अमेरिका ने अलग-अलग मोर्चों पर जारी संघर्षों के खात्मे को इस वार्ता के लगातार जारी रहने और पूरा होने से जोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे बड़ी पेच यह है कि अगर ईरान इन सभी शर्तों को मान भी लेता है, तब भी अमेरिका और इजरायल की तरफ से सैन्य कार्रवाई का खतरा पूरी तरह टलेगा नहीं।
ईरान ने भी रखीं पांच शर्तें, कहा- अमेरिका बिना ठोस रियायत दिए फायदा उठाना चाहता है
अमेरिकी रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी मीडिया ने कहा है कि वॉशिंगटन युद्ध के अंत के लिए कोई ठोस रियायत देने में पूरी तरह नाकाम रहा है। मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका बिना कुछ दिए उन रियायतों को हासिल करना चाहता है जो वह युद्ध के मैदान में नहीं जीत सका, जिससे बातचीत अब अधर में लटक सकती है। जवाब में तेहरान ने भी बातचीत आगे बढ़ाने के लिए पांच 'विश्वास-बहाली' (Confidence-Building) की शर्तें सामने रखी हैं। इनमें सभी मोर्चों (विशेषकर लेबनान) पर संघर्षों का खात्मा, प्रतिबंध हटाना, फ्रीज फंड्स की तत्काल रिहाई, युद्ध के नुकसान का मुआवजा और वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे अहम रास्ते 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल है।
कूटनीति की आड़ में सैन्य एजेंडा चलाने का आरोप, 'क्रशिंग ब्लो' की दी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे कूटनीति का इस्तेमाल सिर्फ अपने सैन्य लक्ष्यों को छिपाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि अमेरिका और इजरायल वैश्विक ऊर्जा बाजारों की सुरक्षा का झूठा दावा कर रहे हैं, जबकि असलियत में वे खुद अस्थिरता पैदा करने के जिम्मेदार हैं। इस बीच, ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि दोबारा कोई सैन्य हमला किया गया, तो उसका जवाब और ज्यादा घातक और भीषण (Crushing and severe blows) सैन्य प्रहारों से दिया जाएगा।
ट्रम्प ने खारिज किया था शांति प्रस्ताव, फरवरी में हुए हमलों के बाद से बढ़ा है तनाव
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिकी करदाताओं को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। दोनों देशों के बीच तनाव इस साल 28 फरवरी को हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल सैन्य हमलों के बाद बहुत ज्यादा बढ़ गया था। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए स्ट्रैट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को बाधित कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ा था।
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