
यूएस-ईरान में छिड़ेगा महायुद्ध या महा-डील? रविवार को हो सकते हैं साइन
जिनेवा में जेडी वेंस और कलीबाफ कर सकते हैं ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर; होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और पाबंदियां हटाने की शर्तों पर फंसा पेंच.
USA Iran War: मध्य पूर्व में पिछले कई महीनों से छिड़े एक विनाशकारी युद्ध का खतरा अब पूरी तरह शांत होता हुआ नजर आ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए आगामी रविवार (14 जून 2026) तक एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. रॉयटर्स को शुक्रवार को पश्चिमी देशों के एक बेहद विश्वसनीय राजनयिक सूत्र ने यह सनसनीखेज जानकारी दी है. इस महा-डील को फाइनल करने के लिए स्विट्जरलैंड का जिनेवा शहर सबसे संभावित और सुरक्षित जगह माना जा रहा है.
इस अप्रत्याशित समझौते की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कर दी है. ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एक बड़ा बयान दिया:
"हमने अभी-अभी ईरान के साथ युद्ध को रोकने को लेकर एक बेहद शानदार समझौता किया है. अब अमेरिका ईरान पर कोई नया सैन्य हमला नहीं करेगा, क्योंकि शांति का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका है."
ईरान की 'नो कॉम्प्रोमाइज' नीति: ड्राफ्ट में तेहरान की लगभग सभी मांगें मंजूर, ट्रंप को मिला सिर्फ होर्मुज
शुक्रवार को सामने आई समझौते की शर्तों से साफ जाहिर होता है कि इस कूटनीतिक जंग में तेहरान का पलड़ा बेहद भारी रहा है. ईरान को उसकी लगभग सभी बड़ी मांगें पूरी होती दिख रही हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन को अपनी शर्तों में से बहुत कम ही हासिल हुआ है— सिवाय होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने के. गौरतलब है कि फरवरी 2026 में ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले के आदेश के बाद ईरान ने इस रणनीतिक वैश्विक तेल मार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया था.
ईरान के एक सीनियर अधिकारी ने रॉयटर्स को इस सीक्रेट ड्राफ्ट की मुख्य शर्तें बताई हैं:
तेल पाबंदियों से मुक्ति: ईरान के तेल निर्यात पर लगे सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को पूरी तरह हटा लिया जाएगा.
अरबों डॉलर का फंड अनफ्रीज़: दुनिया भर के विदेशी बैंकों में फ्रीज (जब्त) पड़े ईरान के अरबों डॉलर के एसेट्स और फंड को तुरंत बहाल किया जाएगा.
लेबनान में सीजफायर की शर्त: ईरान अपनी इस जिद पर पूरी तरह अड़ा हुआ है कि समझौते में केवल अमेरिका-ईरान ही नहीं, बल्कि लेबनान में भी इजरायली हमलों और लड़ाई को तुरंत खत्म करने की बात शामिल होनी चाहिए, जहां इजरायल ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह (Hezbollah) मिलिशिया से लड़ रहा है.
परमाणु मुद्दे पर बाद में बात; बदले में ईरान क्या देगा, इस पर सस्पेंस
इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम (Nuclear Issues) को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. अमेरिका एक ऐसी दीर्घकालिक डील चाहता है जिससे यह 100% पक्का हो सके कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बनाए, जबकि ईरान का हमेशा से दावा रहा है कि वह केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही यूरेनियम संवर्धन कर रहा है.
ईरानी अधिकारी ने इस बात का कोई खुलासा नहीं किया कि इन तमाम बड़ी रियायतों के बदले ईरान अमेरिका या इजरायल को क्या ठोस आश्वासन या पेशकश दे रहा है. इस रहस्यमयी चुप्पी पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
ईरानी मीडिया का दावा: अमेरिका को देना होगा 300 अरब डॉलर का हर्जाना; हटानी होगी सेना
ईरान की आधिकारिक 'मेहर न्यूज एजेंसी' ने इस समझौते को लेकर और भी बड़े और चौंकाने वाले दावे किए हैं. मेहर की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ शनिवार तक इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे देंगे, ताकि रविवार को इस पर दस्तखत किए जा सकें.
मेहर की रिपोर्ट के मुख्य अंश:
इस समझौते के तहत अमेरिका को खाड़ी क्षेत्र और ईरान के आसपास के देशों से अपनी सेना को पूरी तरह हटाने का वादा करना होगा. इतना ही नहीं, पाबंदियों के कारण बर्बाद हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों को कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग ₹25 लाख करोड़) की एक भारी-भरकम 'पुनर्निर्माण योजना' भी पेश करनी होगी.
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