अमेरिका ईरान युद्ध में सस्ते ड्रोन पर खर्च हो रही महंगी मिसाइलें
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अमेरिका ईरान युद्ध में सस्ते ड्रोन पर खर्च हो रही महंगी मिसाइलें

मिडिल ईस्ट युद्ध में आर्थिक तबाही का मंजर। जानें कैसे ईरान के सस्ते 'शाहिद' ड्रोन अमेरिका के अरबों डॉलर स्वाहा कर रहे हैं और क्यों खाली हो रहे हैं हथियारों के भंडार।


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USA-Israel Vs Iran : अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध को आज तीन दिन बीत चुके हैं। शनिवार से शुरू हुई इस जंग ने अब एक बेहद थका देने वाले मोड़ (War of Attrition) पर दस्तक दे दी है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की ओर से किए जा रहे लगातार ड्रोन हमलों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा दीवार को चुनौती दी है। बहरीन से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक फैले अमेरिकी रक्षा ठिकानों पर भारी दबाव देखा जा रहा है। इस रणनीति का मुख्य आधार 'लागत का अंतर' है। ईरान के पास 'शाहिद-136' जैसे हजारों की संख्या में कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोन हैं। इन ड्रोन्स की निर्माण लागत महज 20,000 डॉलर (करीब 17 लाख रुपये) के आसपास है। इसके विपरीत, इन ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट करने के लिए अमेरिका जिन पैट्रियट मिसाइलों का उपयोग कर रहा है, उनकी एक यूनिट की कीमत 40 लाख डॉलर (करीब 33 करोड़ रुपये) से अधिक है।


ईरान के 'शाहिद-136' (Shahed-136) ड्रोन्स और बुनियादी क्रूज मिसाइलों ने सोमवार को भी पूरे मिडिल ईस्ट में तबाही मचाई। इन हमलों में अमेरिकी सैन्य अड्डों, तेल डिपो और नागरिक इमारतों को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका और इजरायल ने शनिवार से ही ईरान पर सटीक गाइडेड बमों और मिसाइलों से हमले तेज कर दिए हैं। हालांकि अमेरिका का पैट्रियट मिसाइल सिस्टम इन ड्रोन्स को रोकने में 90 प्रतिशत तक सफल रहा है। लेकिन असली चुनौती इन मिसाइलों की भारी कीमत है। महज 20 हजार डॉलर के एक साधारण ड्रोन को नष्ट करने के लिए अमेरिका को 40 लाख डॉलर की एक पैट्रियट मिसाइल दागनी पड़ रही है।

हथियारों की कमी बन सकती है बड़ी बाधा
वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि ईरान और अमेरिका दोनों के पास कुछ ही हफ्तों या दिनों का गोला-बारूद बचा है। कतर जैसे देशों के पास पैट्रियट मिसाइलों का भंडार मौजूदा इस्तेमाल की दर से केवल चार दिन और चल सकता है। हालांकि कतर के अंतरराष्ट्रीय मीडिया कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर इस कमी से इनकार किया है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ईरान के पास लगभग 2,000 बैलिस्टिक मिसाइलें होने का अनुमान है, जबकि उसके पास 'शाहिद' ड्रोन्स की संख्या हजारों में हो सकती है। रूस की मदद से ईरान प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में इन ड्रोन्स का निर्माण करने में सक्षम है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, उनकी सैन्य इकाइयां अब स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। वे पहले से दिए गए सामान्य निर्देशों के आधार पर हमले जारी रखे हुए हैं। वहीं अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि यह युद्ध इराक जैसा लंबा नहीं खिंचेगा। लेकिन सैन्य योजनाकारों के पास चार हफ्ते तक युद्ध जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं दिख रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले जो अनुमान लगाए थे, युद्ध की तीव्रता उससे कहीं ज्यादा नजर आ रही है।

ईरान की रणनीति और इजरायल का पलटवार
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की शनिवार के हवाई हमलों में मृत्यु के बाद तनाव और बढ़ गया है। ईरान की रणनीति अब अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य मनोबल को तोड़ने की है। वे जानते हैं कि ट्रंप के समर्थक लंबे और खर्चीले युद्धों के पक्ष में नहीं हैं। ईरान चाहता है कि खाड़ी देशों पर इतना दबाव बनाया जाए कि वे अमेरिका को अभियान रोकने के लिए मजबूर कर दें। उधर, इजरायल के सुरक्षा कैबिनेट मंत्री एली कोहेन ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक ईरान के 150 मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं। इजरायल का लक्ष्य हवाई प्रभुत्व स्थापित करना और ईरान की सुरंगों को बंद करना है।

इजरायल का 'आयरन बीम' लेजर सिस्टम, जो सस्ते में ड्रोन्स गिराने के लिए बना है, अभी तक युद्ध में इस्तेमाल नहीं हुआ है। सऊदी अरब और यूएई 'थाड' (THAAD) जैसे महंगे सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं, जिसकी एक मिसाइल की कीमत 1.2 करोड़ डॉलर है। यदि ईरान इसी तरह ड्रोन हमले जारी रखता है, तो क्षेत्र में इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी हो सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दोनों पक्षों के घातक हथियार खत्म हो जाते हैं, तो युद्ध एक गतिरोध (Stalemate) की स्थिति में पहुंच सकता है।


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