
अमेरिका-ईरान जंग की आहट! तेल, महंगाई और भारत पर क्या पड़ेगा असर?
Iran US Conflict: इसलिए भारत के लिए जरूरी है कि वह पश्चिम एशिया में अपने आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक हितों की रक्षा करते हुए अपनी विदेश नीति को बहुत सोच-समझकर आगे बढ़ाए।
America Iran Tension: एक तरफ अमेरिका की सख्त चेतावनी है, दूसरी तरफ ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का दावा। यह टकराव सिर्फ दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि तेल, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा बड़ा खतरा बन चुका है। अगर हालात बिगड़े तो इसकी आंच भारत तक पहुंच सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इस बढ़ते टकराव से अरब देशों और अरब लीग में चिंता बढ़ गई है। उन्हें डर है कि अगर युद्ध की स्थिति बनी तो तेल और गैस की सप्लाई रुक सकती है। इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
भारत पर भी पड़ेगा असर
अगर अमेरिका और ईरान के बीच हालात और बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय हितों पर खतरा बढ़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा खाड़ी देशों में काम कर रहे 80 से 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन सकती है।
चाबहार बंदरगाह और कृषि निर्यात पर खतरा
इस तनाव का असर ईरान में मौजूद चाबहार बंदरगाह के संचालन पर भी पड़ सकता है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। साथ ही भारत के कृषि निर्यात, जैसे बासमती चावल, फल और मेवे भी प्रभावित हो सकते हैं। इन सभी वजहों से भारत के सामने एक मुश्किल स्थिति खड़ी हो सकती है।
तेल की कीमतें
ईरान दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 4–5% हिस्सा देता है। अगर वहां संघर्ष बढ़ता है तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डाल सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए कितना अहम?
भारत अपने तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का लगभग 50% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही मंगाता है। अगर इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट आती है तो भारत के लिए ईंधन संकट, बिजली उत्पादन पर असर और आर्थिक दबाव जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
व्यापार और निर्यात पर भी बढ़ी चिंता
हालांकि, ईरान के साथ भारत का सीधा व्यापार बहुत कम है। भारत के कुल निर्यात का सिर्फ 0.3%। लेकिन अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो देश ईरान से व्यापार करेंगे, उन पर 25% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। इससे भारत के बासमती चावल, फल मेवे जैसे उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ सकता है। सप्लाई चेन में रुकावट और भुगतान से जुड़ी दिक्कतें भी आ सकती हैं।
चाबहार बंदरगाह पर भारत का फोकस
रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी भारत के सामने चुनौतियां हैं। अमेरिका के दबाव के कारण चाबहार बंदरगाह में भारत के निवेश पर असर पड़ सकता है। यह बंदरगाह भारत के लिए इसलिए जरूरी है। क्योंकि इससे भारत को मध्य एशिया तक सीधी पहुंच मिलती है।
खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा चिंता का विषय
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी से सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
भारत के लिए संतुलन बनाए रखना क्यों जरूरी?
भारत को इस पूरे मामले में बहुत नाजुक संतुलन बनाना होगा। एक तरफ उसे अमेरिका के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखनी है तो दूसरी तरफ ईरान के साथ भी रिश्ते खराब नहीं करने हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान से जुड़े मुद्दों पर भारत अक्सर तटस्थ रहा है या विरोध में वोट करता आया है। अगर अमेरिका के दबाव में भारत ईरान से दूरी बनाता है तो चीन वहां अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है।

