
होर्मुज पार कर ओमान में फंसे 8 ईरानी टैंकर...ट्रंप की 'लक्ष्मण रेखा'
खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की अभेद्य घेराबंदी के चलते बीच समंदर में इंटरसेप्ट किए गए तेल से भरे 8 ईरानी जहाज। वापस लौटने को मजबूर किया गया...
दुबई/वॉशिंगटन (AP): खाड़ी के अशांत समंदर में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक ऐसी रणनीतिक घेराबंदी की है, जिसे भेद पाना तेहरान के लिए लगभग नामुमकिन साबित हो रहा है। हालिया घटनाक्रम में, ईरान के 8 तेल टैंकरों ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को तो सफलतापूर्वक पार कर लिया। लेकिन वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खींची गई उस 'लक्ष्मण रेखा' को नहीं लांघ पाए जो ओमान की खाड़ी में बनाई गई है। अमेरिकी नौसेना ने इन सभी आठों जहाजों को बीच समुद्र में घेर कर उनकी आगे की यात्रा पर विराम लगा दिया। वॉशिंगटन का यह कदम ईरान की तेल आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि तेहरान को कूटनीतिक समझौते की मेज पर आने के लिए विवश किया जा सके।
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी चक्रव्यूह
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका द्वारा लागू की गई समुद्री नाकाबंदी अब अपने सबसे सख्त दौर में पहुंच चुकी है। 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस विशेष अभियान के शुरू होने के बाद से अमेरिकी नौसेना ने अब तक ईरान से जुड़े कुल 8 तेल टैंकरों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया है।
इस घेराबंदी की कार्यप्रणाली को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जैसे ही ये जहाज ईरान के बंदरगाहों से लंगर उठाकर रवाना होते हैं, अमेरिकी रक्षा तंत्र, जिसमें अत्याधुनिक सैटेलाइट और निगरानी ड्रोन शामिल हैं, सक्रिय हो जाता है। ये जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को तो पार कर लेते हैं लेकिन असली परीक्षा ओमान की खाड़ी में शुरू होती है। जैसे ही कोई संदिग्ध टैंकर इस क्षेत्र में प्रवेश करता है, अमेरिकी युद्धपोत उसे बीच रास्ते में ही रोक लेते हैं। 'न्यूज एजेंसी एपी' ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि यह रणनीति 'पकड़ो और वापस भेजो' (Catch and Return) के सिद्धांत पर आधारित है, जहां जहाजों को चेतावनी देकर वापस ईरान लौटने पर मजबूर कर दिया जाता है।
36 घंटों में चरमराई ईरान की अर्थव्यवस्था
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर, एडमिरल ब्रैड कूपर ने इस समुद्री सैन्य कार्रवाई को लेकर अत्यंत महत्वपूर्ण दावे किए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मध्य-पूर्व के समुद्र पर इस समय पूर्ण रूप से अमेरिका का नियंत्रण है और उनकी 'मैरीटाइम सुपीरियरिटी' (समुद्री सर्वोच्चता) पूरी तरह बरकरार है। कूपर के आंकड़ों के मुताबिक, नाकाबंदी प्रभावी होने के महज 36 घंटों के भीतर ही ईरान के समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह ठप हो गए। चूंकि ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर टिकी है, इसलिए इस नाकाबंदी का सीधा और विनाशकारी प्रहार उसकी आर्थिक रीढ़ पर पड़ा है।
परमाणु हथियार पर ट्रंप का सख्त संदेश
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संदर्भ में अपना कड़ा रुख एक बार फिर दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक सुरक्षा के लिए ईरान का परमाणु शक्ति संपन्न होना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल वह किसी भी प्रकार के युद्धविराम को बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं।
वर्तमान में, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अपने चरम पर हैं। हर छोटी-बड़ी आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यह संपूर्ण घटनाक्रम उस नाजुक समय में सामने आया है जब समूचे क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गलियारों में इस स्थिति पर गहन चिंता जताई जा रही है।

