
चीन से लौटते ही अपने पुराने अंदाज में दिखे डोनाल्ड ट्रंप, 'G-2' मोमेंट
चीन से लौटते ही ट्रंप अपने पुराने अंदाज में नज़र आए और शी जिनपिंग संग बैठक को डोनाल्ड ट्रंप ने 'G-2' मोमेंट का नाम दिया है।
चीन की अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा संपन्न कर स्वदेश लौटते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने चिर-परिचित और आक्रामक अंदाज में दिखाई दिए। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बीजिंग में हुई अपनी उच्च स्तरीय बैठक को एक नया शीर्षक देते हुए ट्रंप ने इसे "G-2" मोमेंट करार दिया। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि यह मुलाकात वैश्विक इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ साबित होने वाली है। इस द्विपक्षीय वार्ता के दौरान उन्होंने चीन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापारिक समझौतों, अमेरिकी कंपनी बोइंग के विमान सौदों और बेहद संवेदनशील ताइवान संकट जैसे प्रमुख मुद्दों पर बहुत बेबाकी से अपनी बात रखी।
'फॉक्स न्यूज' को दिए साक्षात्कार में ट्रंप का बड़ा दावा
चीन की धरती से वापस आने के बाद फॉक्स न्यूज चैनल को दिए एक विशेष इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी इस यात्रा के परिणामों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा, "यह असल में दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली और महान राष्ट्रों की एक ऐतिहासिक बैठक थी। मैं व्यक्तिगत रूप से इसे 'G-2' के रूप में देखता हूँ। मेरा मानना है कि आने वाले समय में इतिहास इस मुलाकात को बहुत ही महत्वपूर्ण और बड़े पड़ाव के तौर पर याद रखेगा।"
अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप शुक्रवार की शाम अमेरिका के मैरीलैंड में स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज हवाई अड्डे पर उतरे। स्वदेश वापसी के सफर के दौरान उन्होंने अलास्का के एंकरेज में भी कुछ वक्त गुजारा था। अमेरिका की धरती पर कदम रखते ही उन्होंने मीडिया के सामने यह दावा ठोक दिया कि उनका चीन दौरा पूरी तरह से कामयाब रहा है और दोनों देशों के बीच कई बड़े तथा महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों पर सहमति बनी है।
बोइंग जेट डील से अमेरिकी कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बूस्ट
आर्थिक मोर्चे पर जानकारी साझा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि इस बैठक के दौरान चीन ने अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी बोइंग से तत्काल प्रभाव से 200 जेट विमान खरीदने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बीजिंग ने भविष्य में अमेरिका से 750 और अतिरिक्त विमान खरीदने का भी औपचारिक वादा किया है। ट्रंप ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बोइंग के इस विशाल सौदे के अलावा, दोनों देशों के बीच हुए नए समझौतों से अमेरिकी कृषि क्षेत्र (कृषि सेक्टर) को भी बहुत बड़ा वित्तीय फायदा पहुंचने वाला है।
ताइवान मुद्दे पर चीन को सख्त और स्पष्ट संदेश
रणनीतिक मोर्चे पर बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान के मुद्दे पर एक बेहद गंभीर और बड़ा बयान जारी किया। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि चीन वर्तमान परिस्थितियों में ताइवान के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य या आक्रामक कार्रवाई नहीं करने जा रहा है, और कम से कम तब तक तो बिल्कुल नहीं, जब तक अमेरिका के राष्ट्रपति पद की कमान उनके हाथों में है। ट्रंप ने चीनी नजरिए को स्पष्ट करते हुए कहा, "चीनी नेतृत्व इसे जबरन कब्जा (टेकओवर) करने के रूप में नहीं देखता। उनकी चिंता सिर्फ इतनी है कि ताइवान खुद को एक पूरी तरह से संप्रभु और स्वतंत्र देश घोषित न करे।"
अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए ट्रंप ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि जब तक मैं इस पद पर आसीन हूँ, चीन ताइवान के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएगा। हालांकि, मेरे कार्यकाल के समाप्त होने के बाद वहां क्या परिस्थितियां बनेंगी, इस बारे में अभी निश्चित रूप से कुछ भी कहना काफी कठिन है।" ट्रंप ने अपनी इच्छा जाहिर करते हुए यह भी जोड़ा कि वह हमेशा यही चाहते हैं कि चीन इस क्षेत्र में शांति बनाए रखे और किसी भी प्रकार के युद्ध या सैन्य टकराव की स्थिति पैदा न होने पाए।
अमेरिकी मीडिया में 'G-2' बयान की गूंज और शी जिनपिंग को न्योता
दूसरी तरफ, अमेरिकी मीडिया जगत में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुई इस मुलाकात के निहितार्थों को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म है। 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि ट्रंप द्वारा इस्तेमाल किए गए "G-2" शब्द यानी 'दो महान देशों' वाले बयान ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर चीन को सीधे तौर पर अमेरिका के समकक्ष एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खुद को अमेरिका के बराबर दिखाना लंबे समय से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वैश्विक कूटनीति और रणनीति का एक मुख्य हिस्सा रहा है।
अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों शीर्ष नेताओं के बीच इस मुलाकात के दौरान जिस प्रकार की गहरी व्यक्तिगत केमिस्ट्री, आपसी सम्मान, गर्मजोशी और रणनीतिक साझेदारी का प्रदर्शन हुआ, उसने दुनिया की इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के आपसी रिश्तों में एक नया और सकारात्मक संदेश भेजा है। इसी दौरान ट्रंप ने इस बात का भी खुलासा किया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को आगामी सितंबर महीने में वॉशिंगटन आने का आधिकारिक निमंत्रण दे दिया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक व्यापार, ताइवान विवाद और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के सुलगते संकटों को सुलझाने के लिए और भी बड़े तथा उच्च स्तरीय संवाद देखने को मिल सकते हैं।

